गोवंश को रखने की बेहतर व्यवस्था के लिए मप्र में आत्मनिर्भर गोशाला के प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। प्रोजेक्ट में न्यूनतम 5 हजार गायों को रखनी की सुविधा वाली गोशाला विकसित होगी, जो खुद के स्रोतों से अपना खर्च निकालेंगी। इनका विकास निजी समूहों की भागीदारी से होगा। हालांकि, पशुपालन एवं डेयरी विभाग को निजी भागीदार ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। पशुपालन विभाग पुरे प्रदेश में 50 स्वावलंबी गोशालाएं खोलने की योजना बनाई है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो सालों में प्रदेश की सड़कों पर बेसहारा गायें भटकती न दिखाई दें। वर्तमान में कुल 22 गोशालाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इन आधुनिक स्वावलंबी गोशालाओं में न्यूनतम 5 हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी। 4 से 5 करोड़ आएगा खर्च बीते कई हफ्तों से पशुपालन विभाग टेंडर निकालकर निजी भागीदारों की तलाश कर रहा है। हालांकि, प्रक्रिया में अब तक खास सफलता नहीं मिली है। जबलपुर, सागर, विदिशा, छतरपुर, देवास सहित लगभग 18 जिलों में इन गोशालाओं की स्थापना के लिए दो बार टेंडर निकाले जा चुके हैं, हाल ही में तीसरी बार टेंडर निकाले गए हैं। पहले चरण में सिर्फ रायसेन और दमोह में ही एक-एक निजी समूह मिले और दूसरे चरण में भी 3 से 4 जिलों में ही बोलियां मिलीं। अब 18 जिलों के लिए तीसरी बार टेंडर जारी हुए हैं, जिनकी अंतिम तारीख 27 जनवरी है। निजी समूहों के द्वारा इन गोशालाओं का निर्माण होना है। एक परिसर पर 4 से 5 करोड़ का खर्च आएगा।


