सिरोही जिले की 4 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले लगभग 12 गांवों में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में जनआंदोलन तेज हो गया है। क्षेत्रवासियों ने 28 जनवरी से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन की घोषणा की है, जो पिछले 4 महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का परिणाम है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना पर्यावरण के लिए घातक है और इससे खेती, जल स्रोत, चारागाह तथा ग्रामीण जीवन की पूरी संरचना तबाह हो जाएगी। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की चुप्पी ने लोगों में गहरा रोष पैदा कर दिया है। यह जानकारी राष्ट्रीय पशुपालक संघ से लाल सिंह रायका, अमित त्रिवेदी, ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल के स्टेट प्रेसिडेंट एडवोकेट सुरेश राजपुरोहित, एडवोकेट तुषार पुरोहित, रमेश घांची, एडवोकेट हार्दिक रावल, पदमाराम घांची, गजाराम घांची, युवा नेता भरत सराधना और पशुपालक संघ के जिलाध्यक्ष सवाराम देवासी ने दी। भीमाना गांव से हुई आंदोलन की शुरुआत
खनन परियोजना के खिलाफ इस आंदोलन की शुरुआत भीमाना गांव से हुई थी, जहां हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर धरना दिया। इसके बाद पिंडवाड़ा उपखंड कार्यालय का घेराव किया गया, जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ हजारों ग्रामीण पहुंचे और परियोजना को निरस्त करने की मांग की। गांवों में लगातार धरने-प्रदर्शन जारी
तब से क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लगातार धरने, जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल किसी एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस पूरी खनन परियोजना को जनता को अंधेरे में रखकर आगे बढ़ाया गया। ग्रामीणों को इस परियोजना की जानकारी तब मिली जब 19 सितंबर 2025 को भीमाना ग्राम पंचायत में पर्यावरण स्वीकृति के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई।
इससे पहले न तो ग्राम सभाओं में कोई चर्चा हुई और न ही ग्रामीणों से सहमति ली गई
राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना निरस्त नहीं हुई तो 28 जनवरी को महा-आंदोलन किया जाएगा। लालजी राईका ने आंदोलन की रणनीति साझा की।


