कमाई छोड़ कैंसर पीड़ितों को बांट रहे चुकंदर:अब तक 120 मरीजों तक पहुंचा चुके; जैविक खेती को अपनाया

​नागौर जिले के जायल उपखंड स्थित सिलारिया गांव के एक युवा किसान ने खेती को मुनाफे के बजाय सेवा का जरिया बनाकर मिसाल पेश की है। 21 साल के किसान भोपालराम बागड़ा अपने खेत में पैदा होने वाले पोषक तत्वों से भरपूर जैविक चुकंदर को कैंसर से जूझ रहे मरीजों को निशुल्क उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक करीब 120 कैंसर पीड़ितों को यह पोषक आहार उनके घर तक पहुंचाया जा रहा है। ​बिना रसायनों के तैयार की फसल भोपालराम ने जैविक खेती के अपने इस नवाचार के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. राकेश से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने झांसी से ही उन्नत किस्म के बीज मंगाकर एक बीघा क्षेत्र में चुकंदर की बुआई की। खास बात यह है कि इस खेती में किसी भी तरह के रासायनिक खाद या जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया गया है। जैविक पद्धति से तैयार होने के कारण यह चुकंदर कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से लड़ रहे लोगों के लिए बेहद गुणकारी साबित हो रहा है। ​आमदनी छोड़कर चुना सेवा का रास्ता बाजार के आंकड़ों के अनुसार, एक बीघे में चुकंदर की फसल से करीब 70 से 80 हजार रुपए तक की कमाई की जा सकती है, जबकि इसकी लागत महज 15 से 20 हजार रुपए आती है। इसके बावजूद भोपालराम ने पहली फसल से आर्थिक लाभ कमाने के बजाय इसे पीड़ित मानवता की मदद के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, वर्तमान समय में मिलावटी और रासायनिक खान-पान बीमारियों का मुख्य कारण है, जिसे केवल जैविक खेती अपनाकर ही रोका जा सकता है। ​पोषक तत्वों का खजाना है चुकंदर विशेषज्ञों के अनुसार, चुकंदर में भरपूर मात्रा में आयरन, फाइबर, नाइट्रेट और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो कैंसर मरीजों में खून की कमी को दूर करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। चुकंदर के साथ-साथ इसके पत्तों की सब्जी भी स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। कम उम्र में समाज के प्रति ऐसी जिम्मेदारी निभाकर भोपालराम अब पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

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