गडरिए का बेटा बनेगा गांव का पहला डॉक्टर:आंखों की बीमारी के चलते डॉक्टर ने ज्यादा पढ़ने से किया था मना, अब मिला AIIMS देवघर

राजस्थान के बाड़मेर जिले के छोटे से गांव बेरीवाला तला के गडरिया परिवार का बेटा गोरधनराम एम्स से डॉक्टर बनेगा। गोरधन गांव का पहला डॉक्टर होगा। नीट में सफल होने के बाद झारखंड के एम्स देवघर में उसे एडमिशन मिला है, जहां उसकी पढ़ाई शुरू हो गई है। कोटा से पढे़ स्टूडेंट गोरधनराम बाना की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। सीमित संसाधन, कमजोर आर्थिक स्थिति, बीमारी और बड़े भाई की असमय मौत के दुख जैसे हालातों के बीच गोरधनराम ने यह सफलता हासिल की। नीट 2025 में ऑल इंडिया रैंक 4498 और ओबीसी कैटेगरी रैंक 1720 हासिल की। गोरधनराम के गांव में बिजली तो आती है, लेकिन पानी के लिए आज भी बारिश पर निर्भरता है। बारिश के मौसम में टांकें भरते है, उससे ही पूरे साल की पानी की जरूरत पूरी होती है। माता-पिता अब भी झोपड़ियों मे रहते हैं तीन साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना से मकान आवंटित हुआ है लेकिन, भेड़ों-बकरियों को चराने की वजह से माता-पिता अब भी झोपड़ियों में रहते हैं। गोरधनराम शुरू से पढ़ाई में होशियार था। उसने 10वीं कक्षा सरकारी स्कूल से 77.50 प्रतिशत से पास की। 12वीं कक्षा में 93.60 प्रतिशत हासिल किए थे। स्कूल के शिक्षकों से नीट परीक्षा के बारे में जानकारी मिली तो उसने खुद के स्तर पर तैयारी प्रारंभ की। गोरधनराम की प्रतिभा और परिवार की आर्थिक विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए कोटा में एलन कोचिंग ने उसकी दो साल की फीस माफ कर दी। भाई की मौत, आंखों में परेशानी गोरधनराम के पिता कुंभाराम एवं माता कौशल देवी अनपढ़ है। परिवार में चार भाई हैं। साल 2021 में सबसे बड़े भाई बिशनाराम आरएएस प्री व मेंस क्लियर कर चुका था, पोस्टिंग की तैयारी थी। तभी सड़क हादसे में मौत हो गई। गोरधन राम ने 2021 में नीट की तैयारी शुरू की। भाई की मौत के बाद गोरधनराम ने संकल्प लिया कि मुझे डॉक्टर बनकर परिवार की स्थिति को सुधारना है। पढ़ाई के दौरान आंखों में समस्या हो गई। लगातार दर्द के साथ आंखों में खुजली एवं पानी बहता रहता था। डॉक्टरों ने ज्यादा पढ़ाई करने से मना किया, लेकिन गोरधनराम के पास पढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए उसने तैयारी जारी रखी। दूसरा बड़ा भाई मानाराम भी आरएएस प्री पास कर चुका है और मेन्स की तैयारी कर रहा है। तीसरा भाई चैनाराम बीएड करने के बाद एसआई की तैयारी कर रहा है। माता-पिता पढ़ाई का महत्व समझते हैं इसलिए बच्चों को किसी भी तरह से पढ़ा रहे हैं। चार अटैंप्ट के बाद मिली सफलता साल 2022 में गोरधनराम ने पहली बार खुद के स्तर पर तैयारी कर नीट का एग्जाम दिया, लेकिन उसमें 328 अंक आए थे। फिर 2023 में भी सेल्फ स्टडी कर के एग्जाम दिया, जिसमें 465 अंक आए। उसे लगा कि कोटा जाकर बेहतर रिजल्ट मिल सकता है तो टीचर्स की राय पर कोटा आ गया। कोटा कोचिंग ने उसकी प्रतिभा और परिवार के विपरीत हालात को देखते हुए फीस माफ की। साल 2024 में नीट-यूजी में 600 नंबर और 2025 में 575 नंबर आए। एम्स देवघर मिला, जहां एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई चल रही है। अच्छा डॉक्टर बनकर सेवा करना चाहता हूं गोरधनराम कहता है कि कोटा कोचिंग ने मेरी जिंदगी बदली, मेरे सपनों को दिशा दी। आत्मविश्वास जगाया और मुझे मंज़िल तक पहुंचाया। जहाँ उम्मीदें कम थीं। मैं और मेरा पूरा परिवार दिल से धन्यवाद व्यक्त करता है। कोटा कोचिंग के सहयोग, मार्गदर्शन व निरंतर मेहनत के बल पर मैं सपना पूरा कर पाया। मेरा संकल्प है कि अच्छा डॉक्टर बनकर अपने ज्ञान व सेवा भाव के माध्यम से लोगों की निस्वार्थ मदद कर सकूं।

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