भास्कर न्यूज | चिल्फी घाटी ग्राम पंचायत झलमला जंगल में 18 जनवरी को देव मड़ई का आयोजन किया जाएगा। यह मंडई केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध लोकसंस्कृति, सामूहिक परंपराओं और उत्सव की जीवंत तस्वीर पेश करती है। मंडई के दिन आदिवासी समाज के लोग नए वस्त्र धारण कर, मयूर पंख से सुसज्जित बांस के डंडे के साथ पूरे मेले का भ्रमण करते हैं। इसके बाद एक निश्चित स्थल पर विधिवत पूजा–अर्चना कर मेले का शुभारंभ किया जाता है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन, लोकनृत्य और सांस्कृतिक उल्लास के बीच पूरा क्षेत्र उत्सवमय हो उठता है। मेले में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। आदिवासी वस्त्र, घरेलू उपकरण, सजावटी सामान और हस्तशिल्प का व्यापारी मंडई में विशेष आकर्षण बनता है। बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए मौत का कुआं, झूले और विभिन्न आकर्षण मेले की शोभा बढ़ाते हैं। लोग पूरे दिन मेले का भ्रमण करते हैं। लोकगीत सुनते और पारंपरिक खेलों का आनंद लेते हैं। उप सरपंच बीएस धुर्वे ने बताया कि यह मेला दो दिवसीय होता है। पहले दिन लोग मंडई का भ्रमण कर वातावरण का आनंद लेते हैं, जबकि दूसरे दिन ग्रामीण बड़ी संख्या में आवश्यक सामग्री खरीदते हैं।


