चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि युद्ध चार दिन चलेगा या चार साल, यह पहले से कोई नहीं बता सकता, इसका अंदाजा युद्ध क्षेत्र में ही लगता है। ऐसे में अगर देश को लंबी लड़ाई लड़नी है तो सेना का साजो-सामान देश में ही बनना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसकी रिपेयरिंग भी भारत में ही होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अगर किसी इक्विपमेंट की कमी होती है तो उसे पूरा करने के लिए कई रास्ते होने चाहिए। जैसे विदेश से खरीदना, विदेशी टेक्नोलॉजी भारत लाकर यहां उत्पादन करना या विदेशी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए आमंत्रित करना। इन अलग-अलग चैनलों के जरिए आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सकता है। द्विवेदी ने बताया कि आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कड़ी रिसर्च एंड डेवलपमेंट है। जब तक देश अनुसंधान पर गंभीरता से काम नहीं करेगा और सिर्फ टेक्नोलॉजी लाकर उसे बनाता रहेगा, तब तक लंबी लड़ाई लड़ने की क्षमता नहीं बन पाएगी और न ही पूरी आत्मनिर्भरता हासिल हो सकेगी। इसी सोच के तहत भारतीय सेना डीआरडीओ, एकेडमियां, इंडस्ट्री और पॉलिसी मेकर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आईडीईएक्स” (iDEX) की ‘अदिति’ स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है और जब नया इक्विपमेंट सेना की जरूरतों पर खरा उतरता है तो उसके ऑर्डर 4 से 6 गुना तक दिए जा सकते हैं, जबकि नई डिफेंस प्रोसीजर में इसे और बढ़ाने की तैयारी है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट को लेकर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल द्विवेदी ने बताया कि भविष्य में लंबी लड़ाई की स्थिति में देश को आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है। इसके लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी लाना या उसे बनाना काफी नहीं है, बल्कि मजबूत रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर फोकस करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जब तक भारत रिसर्च की दिशा में गंभीरता से काम नहीं करेगा, तब तक पूरी आत्मनिर्भरता हासिल नहीं हो सकती। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना डीआरडीओ, एकेडमियां, इंडस्ट्री और पॉलिसी मेकर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आईडीईएक्स और ‘अदिति’ स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है और जब नया इक्विपमेंट सेना की जरूरतों पर खरा उतरता है तो उसके ऑर्डर 4 से 6 गुना तक बढ़ाए जा सकते हैं, जिसे नई डिफेंस प्रोसीजर में और आगे बढ़ाने की तैयारी है। जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड का आयोजन जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड के समापन के बाद चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने जयपुर के नागरिकों, राजस्थान सरकार और सेना के जवानों को आर्मी डे की शुभकामनाएं दीं। जनरल द्विवेदी ने बताया कि ऐतिहासिक और सुंदर शहर जयपुर में सेना दिवस मनाना उनके लिए गर्व का विषय है और इस मौके पर देश के सैनिकों, सिविलियन कर्मचारियों, वेटरन्स, वीर नारियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी यह दिखाती है कि सेना और आम जनता के बीच कितना गहरा संबंध है। जयपुर में आर्मी डे का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने की कोशिश है। परेड के साथ ‘नो योर आर्मी’ एग्जिबिशन जैसे कार्यक्रमों ने इस जुड़ाव को और मजबूत किया है। भैरव बटालियन से बढ़ेगी सेना की लड़ाकू क्षमता चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल ने बताया कि भैरव बटालियन जैसी नई ऑर्गेनाइजेशंस सेना की लड़ाई की एफिशिएंसी को कई गुना बढ़ा सकती हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी भी युद्ध की अवधि का पहले से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, वह चार दिन भी चल सकता है या चार साल भी। इस युद्ध से यह भी सीख मिली है कि टेक्नोलॉजी सैनिक की जगह नहीं लेती, बल्कि उसकी क्षमता और एफिशिएंसी को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि आज की लड़ाइयों में छोटी टुकड़ियां बड़ी टुकडिय़ों के मुकाबले ज्यादा प्रभावी साबित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले से बनी यूनिट्स में बदलाव की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी होती है, जबकि नई बनाई गई यूनिट्स तेजी से बदलाव अपना लेती हैं। इसी सोच के तहत भैरव बटालियन को खड़ा किया गया है, जो सामान्य इन्फेंट्री और स्पेशल फोर्स के बीच के गैप को कवर करती है। उन्होंने बताया कि परेड में भैरव बटालियन ने जिस तरह अपनी क्षमता दिखाई है, उसे देखते हुए अगर ऐसी 25 बटालियन खड़ी कर दी जाएं, तो पारंपरिक इन्फेंट्री की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नई जंग के लिए नई रणनीति जरूरी: जनरल द्विवेदी जनरल द्विवेदी ने बताया कि आज की परेड में दिव्यास्त्र और शक्ति बाण जैसी यूनिट्स की ताकत भी देखने को मिली। उन्होंने बताया कि आधुनिक ड्रोन 400 मीटर से लेकर 400 किलोमीटर, यहां तक कि 800 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे ड्रोन पूरे युद्ध क्षेत्र में घूमकर जरूरत के मुताबिक स्ट्राइक करने, इनफॉर्मेशन देने और कार्रवाई करने में सक्षम होते हैं। इसके लिए सेना को नए ऑर्गेनाइजेशन और सुपर स्पेशियलिटी ट्रेनिंग वाले जवानों की जरूरत है, जो टारगेट की पहचान, ऑपरेशन और अपने व दुश्मन के सैनिकों में फर्क कर सकें। उन्होंने बताया कि बदलाव सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं हैं, आर्म्ड, मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और सिग्नल्स जैसी यूनिट्स में भी बदलाव किए जाएंगे, क्योंकि तेजी से बदलते युद्ध क्षेत्र में टिके रहने के लिए उससे भी तेज तैयारियां जरूरी हैं। समय के साथ खुद को लगातार बदलती रहेगी भारतीय सेना चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल ने बताया कि मौजूदा समय में जो जरूरी लगा, उसकी तैयारी की गई है और परेड के माध्यम से उसे सामने रखा गया है। आने वाले दिनों में इन तैयारियों को और आगे बढ़ाया जाएगा और भारतीय सेना समय के साथ खुद को लगातार बदलती रहेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सेना का जवान सरहद पर डटा रहता है, लेकिन उसके परिवार की देखरेख एक आम नागरिक की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों के पीछे पूरा देश उनके परिवारों के साथ खड़ा रहे, यही इस परेड का भी अहम संदेश है। भविष्य की जंग के लिए बदली सेना की सोच जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में साफ बदलाव आया है। सेना अब सिर्फ मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रही है। इसी दिशा में नए स्ट्रक्चर्स तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के तहत भैरव बटालियन, अग्नि प्लाटून्स, शक्ति बाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं, जिनकी झलक आर्मी डे परेड में देखने को मिली। उन्होंने बताया कि ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक रिस्पॉन्सिव और मिशन ओरिएंटेड सेना के निर्माण को दिखाती हैं। परेड में दिखा परंपरा और परिवर्तन का संगम उन्होंने बताया कि इस बदलाव का आधार आत्मनिर्भरता है, जिसकी झलक परेड के दौरान मेड इन इंडिया उपकरणों में साफ नजर आई। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे वेपन सिस्टम और इक्विपमेंट चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। उन्होंने बताया कि ऐसे संसाधनों पर भी फोकस किया जा रहा है, जो मिलिट्री के साथ-साथ सिविलियन जरूरतों में भी काम आएं, ताकि सेना के लिए विकसित इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन देश के समग्र विकास में भी योगदान दे सकें। एक फ्यूचर रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही भारतीय सेना जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना एक फ्यूचर रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां वेल ग्रेडेड सोल्जर, मॉडर्न सिस्टम और मल्टी डोमेन ऑपरेशन की क्षमता पर काम हो रहा है। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सैनिक को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उसे और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए अगले दो साल को सेना ने ‘इयर्स ऑफ नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी’ के रूप में अपनाया है, जिससे कनेक्टिविटी, इनफॉर्मेशन फ्लो और डिसीजन मेकिंग और बेहतर हो सके। उन्होंने बताया कि आज की परेड में परंपरा और परिवर्तन का सुंदर संगम देखने को मिला। राजस्थान की वीर परंपरा और जयपुर के माहौल ने बनाया आर्मी डे परेड का केंद्र द्विवेदी ने बताया कि आर्मी डे परेड को राजस्थान लाने के पीछे स्पष्ट वजह थी। आज की तारीख में भारतीय सेना में सबसे ज्यादा बहादुर सैनिक राजस्थान से हैं। यह वही धरती है, जहां मेजर शैतान सिंह और अब्दुल हमीद जैसे वीर पैदा हुए, जिन्होंने न सिर्फ देश की सेवा की बल्कि यहीं से इतिहास भी रचा। उन्होंने बताया कि राजस्थान वीरों की भूमि रही है और इसी परंपरा को सम्मान देने के लिए आर्मी डे परेड का आयोजन यहां किया गया। उन्होंने बताया कि जयपुर ऐसा शहर है जहां सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक परिवर्तन साथ-साथ चलते हैं। जब सेना की सोच और जयपुर का माहौल एक ही एकाग्रता के साथ आगे बढ़ता है, तो ऐसे में जयपुर से बेहतर आर्मी डे परेड के लिए कोई और स्थान नहीं हो सकता भारतीय सेना का परिवर्तन आत्मनिर्भरता पर आधारित जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना का परिवर्तन आत्मनिर्भरता पर आधारित है, जिसकी झलक परेड में मेड इन इंडिया उपकरणों के जरिए देखने को मिली। सेना को भविष्य में ऐसे वेपन सिस्टम और इक्विपमेंट चाहिए जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप हो। उन्होंने बताया कि मिलिट्री जरूरतों के साथ-साथ ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी फोकस किया जा रहा है, जो सिविलियन उपयोग और देश के समग्र विकास में भी काम आए। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान के प्रोपगेंडा पर जवाब पाकिस्तान के प्रोपगेंडा पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जो भी दुष्प्रचार किया जा रहा है, उसके मुकाबले भारतीय सेना का पक्ष कहीं ज्यादा पॉजिटिव और मजबूत है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ पर काम करती है और एडीजी प्लेटफॉर्म से जो भी जानकारी दी जाती है, वह तथ्यात्मक और विश्वसनीय होती है। उन्होंने यह भी बताया कि आज के इन्फॉर्मेशन वॉर में क्रेडिबिलिटी और सादगी सबसे ज्यादा जरूरी है।


