करौली जिले में प्रस्तावित ब्यावर-भरतपुर ग्रीन एक्सप्रेस-वे का किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि यह परियोजना अति उपजाऊ कृषि भूमि और लघु-सीमांत किसानों की आजीविका के लिए हानिकारक है। उन्होंने इसे रद्द करने की मांग करते हुए जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। यह विरोध हिंडौन क्षेत्र के किसानों द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के सर्वे को लेकर किया जा रहा है। किसानों ने बताया कि यह एक्सप्रेस-वे हिंडौन से बयाना तक हाड़ोली, शेरपुर, रारा, शाहपुर, खेड़ी हैवत, सोमली, जटवाड़ा और भुकरावली गांवों से होकर गुजरने का प्रस्ताव है। किसानों का कहना है कि हिंडौन से भरतपुर के बीच पहले से ही एक स्टेट हाईवे मौजूद है, जो प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे से केवल दो किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में एक नए एक्सप्रेस-वे की कोई आवश्यकता नहीं है। यह परियोजना अति उपजाऊ कृषि भूमि से होकर गुजरेगी, जहां वर्ष में तीन फसलें ली जाती हैं। क्षेत्र के अधिकांश किसान लघु और सीमांत श्रेणी के हैं, जिनके पास मात्र एक से दो बीघा भूमि है। भूमि अधिग्रहण की स्थिति में वे पूरी तरह भूमिहीन हो जाएंगे और उनकी आजीविका समाप्त हो जाएगी। किसानों ने यह आशंका भी जताई है कि प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे लगभग 15 से 20 फीट ऊंचाई पर बनेगा। इससे खेतों के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने के लिए किसानों को कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, एक ओर ग्रीन एक्सप्रेस-वे और दूसरी ओर ईआरसीपी परियोजना की नहर प्रस्तावित होने से क्षेत्र के किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से राजस्थान सरकार से मांग की है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस ग्रीन एक्सप्रेस-वे परियोजना को निरस्त किया जाए, ताकि उनकी आजीविका और जीवन-यापन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।


