राष्ट्रपति सचिवालय ने अरावली संरक्षण मामले में कार्रवाई की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम दायर एक याचिका पर सचिवालय ने 12 जनवरी को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को आवश्यक निर्देश दिए हैं। यह याचिका राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक और बूंदी के कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने दायर की थी। उन्होंने 24 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति सचिवालय में यह याचिका प्रस्तुत की थी। शर्मा ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में भी इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। याचिका में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण हेतु कड़े कानून बनाने की मांग की गई है। इसमें विशेष रूप से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली मानने वाले मौजूदा प्रावधान को स्थायी रूप से हटाने की अपील की गई है।
याचिकाकर्ता ने पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण संरक्षण के आधार पर अरावली पर्वतमाला की एक स्थायी और व्यापक परिभाषा निर्धारित करने की मांग की है। अरावली को भूजल पुनर्भरण का एक प्रमुख स्रोत बताया गया है। याचिका में चेतावनी दी गई है कि अरावली पर्वतमाला के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ से भीषण जल संकट उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि इसे आधे भारत की जीवन रेखा माना जाता है। भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत उस रिपोर्ट की भी आलोचना की गई है, जिसमें हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों में केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला मानने की बात कही गई थी। याचिका में इस प्रावधान को मानव जीवन के हितों के विपरीत बताया गया है।


