मध्य प्रदेश की टांडा गैंग पहले गूगल पर पॉश कॉलोनियों को सर्च करती थी, फिर रेकी करके चोरी की योजना बनाती और वारदात को अंजाम देती थी। यह गैंग दो गुटों में बंटी हुई थी। पहला गुट चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था, जबकि दूसरा गुट चोरी के माल को ठिकाने लगाता था। कोटा ग्रामीण पुलिस ने गैंग को उस समय दबोच लिया, जब वे इंदौर (मध्य प्रदेश) की एक पॉश कॉलोनी में रेकी कर वारदात की योजना बना रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 133 ग्राम सोना, डेढ़ किलो चांदी, 30 लाख रुपए की नगदी और वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी को जब्त किया है। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग राजस्थान के कोटा, झालावाड़ और बारां जिलों में सक्रिय थी। CFCL में नकबजनी की वारदात हुई थी
ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि 13-14 दिसंबर 2025 को कोटा जिले के गढेपान स्थित सीएफसीएल में नकबजनी की वारदात हुई थी। पुलिस की टीम को पहली लोकेशन खानपुर टोल पर मिली, जिसके बाद बदमाशों का लगातार पीछा किया गया। टीम ने 600 किलोमीटर की दूरी तक 1500 सीसीटीवी कैमरे खंगालकर बदमाशों को पकड़ा। पांच बंगलों को गूगल पर सर्च किया
पूछताछ में सामने आया कि यह गैंग मध्य प्रदेश के टांडा गांव की है, जो गूगल पर पॉश कॉलोनियों को सर्च कर वारदात को अंजाम देती है। सीएफसीएल में वारदात करने से पहले आरोपियों ने पांच बंगलों को गूगल पर सर्च किया, फिर दो बंगलों में वारदात की। इस गैंग ने गुना (मध्य प्रदेश) में करोड़ों की नकबजनी की। सितंबर में झालावाड़ थर्मल पावर ग्रिड में 13 मकानों में वारदात की और अंता (बारां) में भी इसी गैंग के द्वारा नकबजनी की वारदात को अंजाम दिया गया था। इन आरोपियों पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने गैंग के मुख्य सरगना करण (24), भरत मंडलोई (30), अन सिंह मेहड़ा (28) निवासी टांडा गांव जिला धार मध्य प्रदेश को गिरफ्तार किया है। चोरी का माल खरीदने के आरोप में राज सोनी (30) निवासी जोबट जिला अलीराजपुर मध्य प्रदेश, हार्दिक सोनी (32) निवासी थाना गारबाड़ा जिला दाहोद गुजरात, संजय सोनी (29) इंदौर मध्य प्रदेश को गिरफ्तार किया गया है। भरत-करन के खिलाफ 30 से ज्यादा मामले
कोटा के सीएफसीएल में वारदात करने करन के साथ मान सिंह, संजय, महेंद्र आए थे। भरत सिंह व करन के खिलाफ 30 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। मामले में गैंग के अन्य आरोपी और माल खरीदने वाले संजय, मानसिंह, महेंद्र, राहुल सोनी, चेतन सोनी फरार हैं। एक टीम चोरी करती थी, तो दूसरी माल को ठिकाने लगाती थी
इस गैंग से जुड़े हर सदस्य का अलग-अलग काम था। एक टीम चोरी करती थी, तो दूसरी टीम माल को बेचती थी। भरत और मान सिंह चोरी के सामान को बेचते थे। इन्होंने 2 जगहों इंदौर और झाबुआ में सोना चांदी बेचा था। झाबुआ में चेतन और राहुल को माल बेचा था। दोनों फरार हैं, लेकिन राहुल का भाई चेतन और उसका साला हार्दिक को पकड़ लिया गया है। कोटा जिले के सीएफसीएल में वारदात करने से पहले, उन्होंने गूगल मैप पर कॉलोनी को खोजा था। फिर, वे टाउनशिप के पीछे की बाउंड्री के तारों को काटकर अंदर घुसे थे, और सुने मकानों के ताले तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। एक व्यक्ति सुनसान जगह पर कार खड़ी करके इंतजार करता रहा। सभी आरोपी आते ही मौके से फरार हो गए थे।


