राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर,धौलपुर में घी कारोबारियों के यहां आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा। जोधपुर में मालाणी डेयरी कारोबारी के पांच अलग-अलग ठिकानों पर यह कार्रवाई चल रही है। कार्रवाई व्यवसायी घनश्याम सोनी और उनसे जुड़ी फर्मों पर की जा रही है। इसमें मंडोर मंडी, न्यू पावर हाउस रोड, बोरानाडा इंडस्ट्रियल एरिया, शहर के भीतरी हिस्से में स्थित घर, शास्त्री नगर का बंगला शामिल है। कार्रवाई के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने या अंदर से बाहर आने की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस को तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि विभाग को समूह की ओर से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और अघोषित आय के इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर यह सर्च ऑपरेशन चलाया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार यूपी से आयकर इन्वेस्टिगेशन विंग की टीम बुधवार को फ्लाइट से जोधपुर पहुंची थी। यहां से टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। नागौर और बीकानेर में भी कार्रवाई चल रही है। कौन हैं घनश्याम सोनी और मालाणी डेयरी ग्रुप?
मालाणी ग्रुप जोधपुर सहित पश्चिमी राजस्थान में डेयरी उत्पादों, विशेषकर घी के थोक व्यापारी है। समूह के संबंध में ऑनलाइन उपलब्ध कंपनी डेटा के अनुसार, मालाणी डेयरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में घनश्याम सोनी के अलावा सुनीता सोनी, विनोद सोनी और विवेक सोनी शामिल है। विभिन्न बिजनेस लिस्टिंग प्लेटफॉर्म पर कंपनी का टर्नओवर 500 करोड़ रुपए से अधिक बताया गया है, जो इसके बड़े पैमाने के कारोबार को दर्शाता है। कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस गुलाब सागर क्षेत्र में है, जबकि गोदाम और कामकाज मंडोर मंडी और बासनी/बोरानाडा औद्योगिक क्षेत्रों से संचालित होता है। अन्य कारोबारियों में हड़कंप
कार्रवाई की सूचना के बाद मंडोर मंडी और बोरानाडा औद्योगिक क्षेत्र के अन्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया। फिलहाल विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। बीकानेर में भी कार्रवाई
बीकानेर में घी कारोबारी मोहनलाल आशीष कुमार फर्म के यहां आयकर विभाग ने छापा मारा है। कोयला गली में स्थित इस फर्म के ऑफिस में आयकर अधिकारी रिकॉर्ड चेक कर रहे हैं। धौलपुर में भी डेयरी पर छापा
धौलपुर जिले के रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित भोले बाबा डेयरी पर भी आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा। बताया जा रहा है कि यह डेयरी आगरा की एक फर्म के नाम पर रजिस्टर्ड है। सुबह करीब 6 बजे गाड़ियों से आयकर अधिकारी फैक्ट्री परिसर पहुंचे और दस्तावेजों की जांच शुरू की। भोले बाबा नाम से देश में तीन राज्यों में घी कारोबार करने वाली कंपनियां
देश में भोले बाबा नाम से तीन राज्यों में घी का कारोबार करने वाली कंपनियां है। इनमें से एक कंपनी तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी सप्लाई करने के मामले में जांच के दायरे में आई थी। यह भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी थी, जिसका प्लांट उत्तराखंड के रुड़की ओर भगवानपुर में है। इसके प्रमोटर्स पॉमिल जैन और विपिन जैन है। इस फर्म पर मिल्कलेस डेयरी होने और सिंथेटिक घी सप्लाई करने का आरोप था। गुरुवार को धौलपुर वाले भोले बाबा मिल्क फूड इंडस्ट्रीज समूह पर कार्रवाई हुई। इस समूह का मुख्य कारोबार धौलपुर और अलीगढ़/कोसी (यूपी) से चलता है। इनके उत्पादों का ब्रांड नाम कृष्णा या धौलपुर फ्रेश है। इस कंपनी के डायरेक्टर्स में हरि शंकर अग्रवाल, कृष्ण मुरारी लाल अग्रवाल, तरुण अग्रवाल आदि के नाम शामिल है। जोधपुर से मालाणी डेयरी ने धौलपुर वाली भोले बाबा कंपनी को माल सप्लाई किया था। जांच का आधार क्या? आयातित तेल की खरीद-बिक्री पर टिकी जांच
आयकर सूत्रों के अनुसार, रडार पर आई डेयरी फर्मों (जैसे मालाणी डेयरी) के बही-खातों में सबसे बड़ा झोल ‘कच्चे माल’ की खरीद और उसकी खपत के गणित में उलझा हुआ है। जांच अधिकारी इन तीन सवालों के जरिए मिलावट या टैक्स चोरी के इस खेल को डिकोड करने की कोशिश कर रहे हैं। ऑयल आया, लेकिन बिका किसको?
जांच में सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्म ने भारी मात्रा में आयातित तेल या वेजिटेबल फैट आयात किया या खरीदा, तो वह गया कहां? नियम के मुताबिक, यदि तेल खरीदा गया, तो या तो उसे ‘ट्रेडिंग’ के तहत किसी और को बेचा जाना चाहिए था, या फिर किसी उत्पाद में इस्तेमाल होना चाहिए था। यदि बुक्स में तेल की बिक्री का कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो इसका सीधा मतलब है कि उस तेल का इस्तेमाल फैक्ट्री के भीतर ही हुआ है और अगर फैक्ट्री ‘घी’ बनाती है, तो यह तेल घी में ही खपाया गया होगा। घी असली है, तो दूध-क्रीम की खरीद कहां है?
दूसरा सवाल ‘इनपुट-आउटपुट रेशियो’ का मामला है। वैज्ञानिक तौर पर 1 किलो शुद्ध घी बनाने के लिए लगभग 20-25 लीटर दूध या निर्धारित मात्रा में बटर/क्रीम की जरूरत होती है। विभाग यह चेक कर रहा है कि जितना ‘फिनिश्ड गुड्स’ (घी) बेचा गया, क्या उसके अनुपात में दूध या क्रीम की खरीद के बिल मौजूद है? यदि उन्होंने तेल का इस्तेमाल नहीं किया, तो उन्हें यह साबित करना होगा कि उन्होंने भारी मात्रा में महंगी क्रीम/बटर खरीदा। बोगस परचेज का खेल
अक्सर तेल की खपत को छुपाने और घी की मात्रा को सही ठहराने के लिए डेयरियां कागज पर बोगस खरीद दिखाती है। यानी, ऐसे किसानों या वेंडरों से दूध/क्रीम खरीदना दिखाया जाता है, जिनका असल में कोई वजूद ही नहीं होता। यदि तेल का स्टॉक रजिस्टर में जीरो बैलेंस है और घी का उत्पादन टनों में है, तो बीच का यह अंतर ही मिलावट का सबसे बड़ा सबूत बनेगा। — ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान के 3 शहरों में 35-ठिकानों पर इनकम-टैक्स की रेड:भीलवाड़ा में रत्नाकर ग्रुप, सीकर में खंडेलवाल ट्रेडिंग कंपनी और सालासर ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन पर छापेमारी राजस्थान में जयपुर, सीकर और भीलवाड़ा में स्टील कारोबार से जुड़ी कंपनियों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी। स्टील कारोबारी से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी को लेकर सूचना मिल रही थी। (पूरी खबर पढ़ें)


