जयपुर | प्रदेश में प्राइवेट वेटरनरी कॉलेजों को एनओसी जारी करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया (वीसीआई) ने राजस्थान में वेटेरनरी कॉलेज नहीं खोलने को लेकर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इस पत्र को दरकिनार कर पशुपालन विभाग अब कॉलेज खोलने जा रहा है। विभाग ने नए कॉलेज खोलने को लेकर पोर्टल पर आवेदन मांग लिए हैं। करीब 26 लोगों ने आवेदन किया है। आवेदनों की जांच की जा रही है, इसके बाद एनओसी जारी की जाएगी। अधिकारियों ने प्रदेश में नए वेटरनरी कॉलेज खोलने की जरूरत को लेकर 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी ने 7 फरवरी, 2025 को रिपोर्ट दी। इसमें संसाधनों की पूर्ति करते हुए नए कॉलेज खोलने की अनुशंसा की। वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया को लगी, तो उन्होंने 13 मई, 2025 को प्रदेश में वेटरनरी कॉलेज नहीं खोलने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा। नए कॉलेज खोलने पर क्वालिटी पर पड़ेगा असर मुख्य सचिव को लिखे पत्र में काउंसिल ने राजस्थान में प्राइवेट कॉलेज खोलने को लेकर मना किया था। रिपोर्ट में बताया कि काउंसिल की 29 अप्रैल, 2025 को बैठक हुई। इसमें सामने आया कि राजस्थान में पहले से ही प्राइवेट कॉलेज ज्यादा हैं। इन कॉलेजों में हर साल सीटें खाली रह रही हैं। वहीं, सरकारी कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। पहले शिक्षकों की पूर्ति की जाए। अगर नए कॉलेज खोले जाते हैं, तो पशु चिकित्सा शिक्षा के मानकों में गिरावट आ आती है। वर्तमान में राजस्थान राज्य में सरकारी क्षेत्र के 3 और निजी क्षेत्र के 9 पशु चिकित्सा महाविद्यालय हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 और उसके बाद से राजस्थान राज्य में 2 निजी पशु चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए आशय पत्र (एलओआई) जारी किया है। परिषद ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार को सलाह दी जाती है कि वह राज्य में नए पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोलने के लिए गैर-अनुमति (NOC) और अनिवार्यता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाए। कमेटी की रिपोर्ट, कॉलेज नहीं खोले, विभाग ने पोर्टल पर मांगे आवेदन विभाग ने 8 सदस्यों की कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने भी प्रदेश में प्राइवेट वेटरनरी कॉलेज नहीं खोले की रिपोर्ट दी। इसके बावजूद पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने 6 महीने पहले पोर्टल पर कॉलेज खोलने के लिए आवेदन मांग लिए। इन दोनों कमेटी में डॉ. विकास शर्मा कॉमन सदस्य है। इसके बावजूद भी दोनों रिपोर्ट में अलग-अलग मत हैं। यह सब होने के बाद विभाग ने पोर्टल पर प्राइवेट कॉलेज खोलने के लिए आवेदन भी मांग लिए। विभाग के इस फैसले से न सिर्फ नीति में विरोधाभास सामने आया है, बल्कि सरकार की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।


