धर्म का स्वरूप विराट, जब तक सांस चलेगी, सनातन के अभय युद्ध के लिए स​मर्पित रहेगा जीवन : रामभद्राचार्य

सीकर रोड स्थित नींदड़ में चल रही 10 दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के आठवें दिन गुरुवार को तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य महाराज ने सनातन धर्म की विस्तृत से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जब तक सांस चलेगी सनातन धर्म के अभय युद्ध के लिए चलेगी। सनातन धर्म का स्वरूप विराट है, उसमें सृष्टि का कल्याण समाहित है। हर व्यक्ति का सम्मान करना, सबकी चिंता धर्म का मर्म है। सनातन धर्म का स्वरूप विराट है, जिसमें पूरे ब्रह्मांड का कल्याण समाहित है और हर व्यक्ति का सम्मान, सबकी चिंता करना इसका मूल है। आयोजन समिति के अनिल संत ने बताया कि शुक्रवार को 1008 कुंडिया हनुमत महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू समेत कई संत-महंत कथा श्रवण करने आएंगे। गुरुवार को कथा के दौरान गायक कलाकार कन्हैया मित्तल ने हार गया, मैं बाबा अब तो दामन थाम ले…, हारा हूं बाबा मुझे तुझपे भरोसा है…, भरदो झोली मेरी…, जैसे भजन सुनाकर वातावरण को भक्ति और उल्लास से भर दिया। इस दौरान कई श्रद्धालु भजनों की स्वर लहरियों पर जयकारे लगाते हुए भाव-विभोर भक्ति भाव नृत्य करने लगे। गुरुवार को जहां बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री और योग गुरु बाबा रामदेव ने जगदगुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया। भगवान का भजन कभी नष्ट नहीं होता महाराज ने कहा कि हनुमान जी की पीठ पर राम लक्ष्मण बैठे, क्योंकि हनुमान धर्म रथ है। रथी का पूरा जीवन सारथी पर निर्भर होता है। धर्म रथी कभी हारता नहीं। कोई भी कर्म, अनुष्ठान ईश्वर के भजन के बिना नहीं हो सकता। कर्म, ज्ञान भजन के बिना नष्ट हो जाएंगे। भगवान का भजन कभी नष्ट नहीं होता। भजन का मतलब भगवान को भजना। भजन का एक मतलब और भी है अद्भुत वस्तु का स्वाद लेना। संस्कृत का ज्ञान अनिवार्य होना चाहिए। संस्कृत के बिना संस्कृति का ज्ञान नहीं हो सकता, जो संस्कृत नहीं जानता वह संत नहीं हो सकता। नींदड़ में कथा सुनने पहुंचे भक्त। कथा का श्रवण करने आए योग गुरु बाबा रामदेव ने जहां रामभद्राचार्य महाराज द्वारा लिखी अंधती महाकाव्य के साथ नारद भक्ति सूत्र सहित कुल चार पुस्तकों का लोकार्पण किया। महाराज के द्वारा अब तक 377 ग्रंथ लिखे जा चुके हैं। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि रामभद्राचार्य सनातन एवं राष्ट्र के गौरव है। उनकी वाणी में सरस्वती है ये राष्ट्र के उद्धारक हैं। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने संस्कृत के श्लोक में महाराज को जन्मदिन की बधाई दी। सनातन एवं राष्ट्र के गौरव है रामभद्राचार्य: बाबा रामदेव

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