भास्कर न्यूज|बालोद भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ राज्य के चुनाव को रद्द करने की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। जिसकी पुष्टि करते हुए भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन और जिपं उपाध्यक्ष तोमन साहू ने बताया कि न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं। चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाएंगे और समाज के लोगों के लिए काम करेंगे। जानकारी अनुसार याचिका लगाने वालों ने तर्क दिया था कि नियमों में यह प्रावधान है कि राज्य या केंद्र शासित प्रदेश शाखा के महासचिव सदस्य होंगे। सचिव और गैर-मतदान सदस्य भी होंगे। नियमों में यह प्रावधान है कि प्रबंधन समिति संगठन के किसी भी कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण आदि मंत्रालयों के अधिकतम पांच सदस्यों को सह-विकल्पित कर सकती है। प्रतिवादियों के लिए सभी जिला शाखा समितियों के चुनाव कराना अनिवार्य है। प्रतिवादियों ने सभी 33 जिला शाखा समितियों के चुनाव करा दिए हैं, लेकिन जानबूझकर सरगुजा जिला शाखा समिति के चुनाव नहीं कराए हैं। इसके बिना राज्य स्तरीय समिति का चुनाव अवैध है। इसलिए 2024-2027 के लिए राज्य स्तरीय समिति के चुनाव को रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता ने चुनाव परिणाम पर रोक लगाने और याचिका के अंतिम निपटारे तक नव निर्वाचित निकाय को कार्यभार सौंपने मांग की थी। जिसके बाद न्यायालय ने 16 अप्रैल 2025 को आदेश जारी कर छत्तीसगढ़ राज्य की भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के चुनाव पर रोक लगा दी थी और यह भी निर्देश दिया था कि भले ही प्रतिवादियों ने शपथ ले ली हो, वे अगली सुनवाई की तारीख तक चुनाव से संबंधित कोई भी गतिविधि न करें। इसके बाद 8 मई 2025 के अंतरिम आदेश में संशोधन कर निर्देश दिया गया कि निर्वाचित पदाधिकारी स्वयंसेवक के रूप में कार्य करेंगे न कि पदाधिकारी के रूप में और याचिकाकर्ता को भी स्वयंसेवक के रूप में कार्य करने और सेवा का विस्तार करने की स्वतंत्रता दी गई। दूसरे पक्ष ने यह तर्क दिया दूसरे पक्ष ने यह तर्क दिया कि चुनाव नियमों के अनुसार हुआ है। न्यायालय की ओर से पारित अंतरिम आदेश सोसाइटी के सुचारू संचालन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। याचिका में अंतरिम आदेश को रद्द करने और रिट याचिका को खारिज करने मांग की गई थी। तर्क दिया गया कि चुनाव नियमों के अनुसार हुआ है। चूंकि याचिकाकर्ता वोट डालने के योग्य नहीं था इसलिए उसे वोट डालने से रोकना उचित था। इस प्रकार न तो चुनाव का संचालन और न ही याचिकाकर्ता को वोट डालने से रोकना अवैध है। इस न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।


