भास्कर न्यूज | जालंधर मां सरस्वती की पूजा और पतंगबाजी के लिए मशहूर बसंत पंचमी इस बार 23 जनवरी को हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। इसे सर्दी का अंतिम पड़ाव माना जाता है। बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के पावन पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। त्योहार के नजदीक आते ही मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में रौनक बढ़ गई है और कलाकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि व विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मिट्टी की मूर्तियां बनाने वाले कारीगर भी मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हैं। कोई मूर्ति का ढांचा बनाने में व्यस्त है तो कोई बने हुए ढांचे में मिट्टी से आकृति को अंतिम रूप दे रहा है। राजस्थान, बिहार के रहने वाले मूर्ति बनाने वाले कारीगर बाबू लाल, पप्पू राम, सोहन लाल, राकेश कुमार ने बताया कि त्योहारों के दिनों में ही स्पेशल जालंधर छह महीने पहले आते हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को धर्म के साथ जोड़ने और लोगों को मां सरस्वती जी की मूर्तियों में मां हंस, कमल, शंख, पुस्तक आदि पर विराजमान हैं और आकर्षित मूर्ति देने के लिए हर बार नया डिजाइन लेकर आते हैं। ज्यादातर ग्राहकों की डिमांड के अनुसार ही मिट्टी की मूर्ति को ही बनाया जाता है क्योंकि मिट्टी की मूर्ति पूजा से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मिट्टी की मूर्ति बनाने कि लिए लगभग 6 से 7 दिन तक लग जाते हैं। उन्होंने बताया कि ग्राहकों की डिमांड पर मूर्ति का डिजाइन और साइज की मूर्तियां बनाते हैं। जैसे-जैसे संस्थाओं के सदस्य ऑर्डर करते है, उसी हिसाब से मूर्तियां बनाया जाता है। अभी तक ब्यास, गुरदासपुर, कपूरथला, फगवाड़ा, जालंधर, पठानकोट व अन्य जिलों से ऑर्डर आने शुरू हो गए हैं। शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन पूजा-पाठ, दान-धर्म शुभ एवं फलदायी होता है। इस दिन पूजा पाठ से अक्षय फल मिलता है। बसंत पंचमी विद्यार्थियों को अन्न दान, शिक्षा देना, गृह प्रवेश, विवाह-शादी, वाहन खरीदना, नींव पत्थर व कई शुभ कार्य करने का उत्तम समय होता है। पीला रंग ज्योतिष में गुरु ग्रह से जुड़ा हुआ है जो ज्ञान, विद्या, अध्यन, विद्वता, बौद्धिक उन्नति आदि का प्रतीक है। इसलिए ज्ञान की देवी माता सरस्वती की आराधना भी इसी दिन की जाती है। ज्योतिषियों के अनुसार, 23 जनवरी को सरस्वती पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा।


