12 दिन बाद खुले स्कूल, ठंड से ठिठुरी हाजिरी, कहीं सन्नाटा तो कहीं धूप में चलीं कक्षाएं

रांची में कड़ाके की ठंड की असर जनजीवन के साथ शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ा है। ठंड के कारण 12 दिन सभी स्कूल बंद रहे। गुरुवार को शहर के प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी स्कूल खुले, लेकिन स्कूलों में रौनक नहीं दिखी। कहीं क्लासरूम सूने रहे तो कहीं गुनगुनी धूप बच्चों की पढ़ाई का सहारा बनी। दैनिक भास्कर ने शहर के चार स्कूलों में जाकर हालात का जायजा लिया। पता चला कि स्कूलों में बच्चों की हाजिरी और पढ़ाई दोनों ही धूप और मौसम के भरोसे चलती दिखी। अभी ठंड का कहर जारी है, लेकिन स्कूल खुले हुए हैं।
69 नामांकित में से सिर्फ 14 बच्चे ही आए राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ओल्ड पुलिस लाइन | सुबह 9.00 बजे धूप बनी सहारा, अहाते में हुई पढ़ाई राजकीयकृत उर्दू कन्या मिडिल स्कूल, पहाड़ीटोला | सुबह 11.00 बजे टूटी हुई थीं खिड़कियां, 4 बच्चे ठंड से कांप रहे थे राजकीयकृत हिंदी कन्या मिडिल स्कूल, पहाड़ीटोला | सुबह 10.30 बजे स्कूल खुला, पर एक भी बच्चा नहीं आया राजकीय म्यूनिसिपल कन्या विद्यालय, श्रद्धानंद रोड | सुबह 9.45 बजे बच्चों के न आने का कारण ठंड बताया गया। पूछताछ पर दोनों शिक्षकों ने बातचीत से इंकार कर दिया और स्कूल का गेट बंद कर अंदर चले गए। प्रिंसिपल कौशर परवीन ने बताया, ‘ठंड के कारण की गई छुट्टी के बाद आज पहला दिन है। इसी वजह से उपस्थिति कम रही।’ ठंड अधिक है, इसलिए बच्चों को धूप में बैठाया। प्रिंसिपल रेशमी श्रीवास्तव ने कहा, ‘कई दिनों बाद स्कूल खुले हैं, ऊपर से ठंड और मकर संक्रांति। इसलिए सिर्फ 20-25 बच्चे ही आए हैं।’ स्कूल में 8वीं तक की कक्षाएं चलती हैं। प्रिंसिपल रागिनी कुमारी ने बताया, ‘ठंड बहुत ज्यादा है, जिससे उपस्थिति बेहद कम है।’ यहां छठी कक्षा तक पढ़ाई होती है। यहां का नजारा सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा। एक भी बच्चा स्कूल नहीं आया। करीब 40 नामांकित छात्रों वाले इस स्कूल में एक शिक्षक और एक शिक्षिका धूप तापते नजर आए। यहां ठंड का असर और साफ दिखा। 69 छात्रों में से महज 14 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। बच्चों को यहां भी धूप वाले बरामदे में बैठाकर पढ़ाया गया। करीब 199 नामांकित छात्रों वाले इस स्कूल में ठंड से बचाव का जुगाड़ निकाला गया। क्लासरूम छोड़कर बच्चों को बरामदे में धूप में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। स्कूल में नामांकन 90 बच्चों का, लेकिन ठंड के कारण महज चार बच्चे ही स्कूल पहुंचे। छह शिक्षक मौजूद थे। टूटी खिड़कियों से आती ठंडी हवा बच्चों को कंपकंपा रही थी, फिर भी क्लासरूम में पढ़ाई जारी रही।

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