बीआरटीएस को नगर निगम कभी समझ ही नहीं पाया। निर्माण के बाद कभी ये नहीं समझा कि लोग किस तरह हर दिन ट्रैफिक में फंस रहे हैं। 11 महीने पहले कोर्ट ने रैलिंग हटाने के आदेश दिए तो अब तक यह काम भी मुकम्मल नहीं हो सका है। रैलिंग हटाने के लिए जैसे-तैसे जो चौथा ठेकेदार मिला था, वह भी काम छोड़कर चला गया। कारण पता किए तो चौंकाने वाले निकले। नगर निगम ने जिस रैलिंग की कीमत 3.5 करोड़ आंकी, ठेकेदार की नजर में उसकी कीमत ढाई करोड़ भी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदार काम करने को राजी नहीं। उधर, निगम खुद भी इस काम में हाथ डालने से कतरा रहा। ऐसे में अब पांचवीं बार टेंडर बुलाने की तैयारी है। दरअसल, निगम ने जिस इंजीनियर से वैल्यूएशन करवाया, उसने बीआरटीएस में 304 ग्रेड का स्टेनलेस स्टील इस्तेमाल होने की रिपोर्ट दी। इसी आधार पर 3.5 करोड़ की वैल्यूएशन मानी गई। बाद में जांच में सामने आया कि बीआरटीएस निर्माण में 304 एसएस के पाइप लगे ही नहीं थे। यानी वैल्युएशन जरूरत से ज्यादा कर दिया गया। यही वजह है कि कोई ठेकेदार 2.5 करोड़ में काम करने को तैयार नहीं है। अब तक चार टेंडर हो चुके हैं। चौथी बार दो फर्मों ने हिस्सा लिया। एक ने 1.5 करोड़ और राजगढ़ के दिनेश यादव ने 2.5 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया। यादव को काम मिला, लेकिन उन्होंने खुद काम न करते हुए पहले इंदौर और फिर जबलपुर के ठेकेदार को काम सौंपा। दोनों ने काम करने से इनकार कर दिया। जिम्मेदार भी मान रहे हैं जांच जरूरी निगम के जिम्मेदार खुद कह रहे हैं कि यह जांच होनी चाहिए कि वैल्युएशन किस आधार पर किया गया। अगर सही सामग्री का आकलन होता तो लागत कम आती और काम आगे बढ़ सकता था। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर का कहना है कि इस काम के वैल्यूएशन की भी जांच होना चाहिए। आखिर किसने इतना वैल्युएशन किया? जबकि कोई 2 करोड़ में भी काम करने को तैयार नहीं है। हाई कोर्ट में निगम की रिपोर्ट से बढ़ी सख्ती निगम प्रशासन ने हाई कोर्ट में यह भी लिखा कि ठेकेदार काम करने के लिए तैयार नहीं है। इसी के बाद कोर्ट ने ठेकेदार को तलब किया। कोर्ट अब यह जानना चाहता है कि जब ठेका मिल चुका है तो काम क्यों नहीं शुरू किया जा रहा। ठेकेदार को तलब किया गया है। अगली सुनवाई में इस पर फैसला होगा। हालांकि अफसर मान रहे हैं कि पांचवीं बार टेंडर बुलवाना होगा। मार्च से अब तक बीआरटीएस तोड़ने का काम शुरू नहीं हो पाया है। पहले अफसर कहते थे कि जरूरत पड़ी तो निगम खुद काम करेगा, लेकिन अब उसके लिए भी कोई ठोस तैयारी नहीं है। 80 फीसदी रैलिंग ही हटाई, वह भी एक तरफ की जब से रैलिंग हटाना शुरू किया, 11 किमी में से 80 फीसदी हिस्से में एक तरफ की पूरी रैलिंग हटा चुके हैं। एलआईजी से पलासिया, गीता भवन से जीपीओ और जीपीओ से नौलखा जैसे बॉटलनैक हिस्से में से भी रैलिंग हटा चुके हैं। फरवरी 2025 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद 11 महीने हो चुके, लेकिन पूरी रैलिंग नहीं हटा सके हैं। अब नया ठेकेदार कब मिलेगा, काम और कितने दिन चलेगा, यह भी तय नहीं है।


