गाड़ियां लोहार समाज की सामाजिक एकता और परंपराओं का अनूठा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब 90 वर्षीय बुजुर्ग के निधन पर उन्हें पूरे सम्मान और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ हाथी पर शव यात्रा निकालकर अंतिम विदाई दी गई। बुजुर्ग की पहचान जागा के रूप में हुई है। उनकी शव यात्रा सूर्य नगर डी-ब्लॉक से प्रारंभ होकर एन.ई.बी. श्मशान घाट तक निकाली गई, जिसमें समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। शव यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें जयपुर से विशेष रूप से मंगवाया गया सुसज्जित हाथी सबसे आगे चल रहा था। हाथी के पीछे घोड़े,ऊंट व डीजे वाहन और समाज के लोग शामिल थे। डीजे की धुन और पारंपरिक बाजों की गूंज ने पूरे वातावरण को अलग ही स्वरूप दे दिया। यात्रा के दौरान समाज के युवक नाचते-गाते नजर आए। परिजनों और समाज के लोगों के अनुसार, इस पूरे आयोजन पर करीब 3 लाख रुपये का खर्च आया, जिसे गड़ियां लोहार समाज के लोगों ने आपसी सहयोग से एकत्र किया। समाज में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है कि किसी सदस्य के निधन पर पूरा समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से साथ खड़ा होता है, ताकि अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जा सके। मृतक के पोते रोहित ने बताया कि उनके दादा जागा समाज में बेहद सम्मानित व्यक्ति थे जो पंच में सही बात कहे जाने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कहा, “हमारे समाज में किसी बुजुर्ग के निधन पर पूरा समाज सहयोग करता है। जयपुर से हाथी मंगवाकर शव यात्रा निकालना हमारी पुरानी परंपरा है, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।” शव यात्रा के दौरान मार्ग में कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर बुजुर्ग को अंतिम प्रणाम किया। समाज के स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाएं संभालीं, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुई।एन.ई.बी. श्मशान घाट पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।


