मिर्धा परिवार में विरासत की जंग: सोशल वार-पलटवार:डॉ. ज्योति और मनीष मिर्धा: समाधि स्थल पर ‘हक’ या जमीन पर ‘कब्जा’? जानें किसका क्या है दावा

नागौर के कद्दावर मिर्धा परिवार की जोधपुर में संपत्ति और विरासत को लेकर छिड़ा विवाद अब पुलिस थाने से निकलकर सोशल मीडिया के अखाड़े तक पहुंच गया है। जोधपुर के सूंथला स्थित फार्म हाउस पर ‘समाधि स्थल’ को लेकर पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा आमने-सामने हैं। गुरुवार, 15 जनवरी की रात मनीष मिर्धा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर अपना दर्द बयां किया, तो शुक्रवार, 16 जनवरी की दोपहर ज्योति मिर्धा ने भी पलटवार करते हुए इसे ‘जमीन कब्जाने की सुनियोजित साजिश’ करार दिया। मनीष मिर्धा का दर्द: ‘पिता की समाधि बनाने से रोका जा रहा’ अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा के निधन के बाद मनीष मिर्धा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने अपने पिता की समाधि का निर्माण कार्य पारिवारिक समाधि स्थल पर शुरू करवाया था। ज्योति मिर्धा का पलटवार: ‘अवैध कब्जे की साजिश’ मनीष के आरोपों के बाद विदेश में मौजूद ज्योति मिर्धा ने शुक्रवार को ‘X’ और फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखकर जवाब दिया। विवाद की जड़ में 150 गज का ‘समाधि स्थल’ इस पूरे विवाद का केंद्र फार्म हाउस के अंदर बना 150 वर्ग गज का वह समाधि स्थल है, जो परिवार की भावनाओं से जुड़ा है। मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस बेशकीमती जमीन को बेचना चाहती हैं, लेकिन बीच में आ रहा पैतृक समाधि स्थल सौदे में बाधा बन रहा है। मनीष का आरोप है कि ज्योति मिर्धा इस समाधि स्थल को हटाना चाहती हैं, जबकि वे अपने पूर्वजों की निशानी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां पर सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि बनाई गई थी। 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि की समाधि बनी। नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद 1996 में उनकी भी समाधि यहीं बनी। अब मनीष अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा का समाधि स्थल यहीं बना रहे हैं, जिसका विरोध किया जा रहा है। शिकायत पक्ष का कहना है कि मनीष ने गुंडा तत्वों के साथ मिलकर मालिकाना हक वाली जमीन हड़पने की नीयत से हमला किया है। क्या है पुलिस केस? गौरतलब है कि 14 जनवरी को ज्योति मिर्धा के केयरटेकर प्रेम प्रकाश ने मनीष मिर्धा के खिलाफ प्रतापनगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि मनीष ने 10-12 साथियों के साथ फार्म हाउस में घुसकर चौकीदार को धमकाया, चाबियां छीनीं और समाधि स्थल में तोड़फोड़ की। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं। मनीष इसे एक बेटे का फर्ज बता रहे हैं, तो ज्योति इसे कानून और मालिकाना हक का उल्लंघन बता रही हैं।

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