रिकॉर्ड बारिश के चलते बीसलपुर बांध में इस सीजन सबसे ज्यादा पानी की आवक निकासी दर्ज हुई है और इसी के साथ 2016 का पुराना रिकॉर्ड टूट गया। इसी बारिश के असर से बांध ने 11वां नया रिकॉर्ड बनाया, जहां एक ही सीजन में 167.929 टीएमसी पानी की आवक और 140.821 टीएमसी पानी की निकासी हुई। यह पूरा घटनाक्रम टोंक जिले के बीसलपुर बांध में इस मानसून सीजन के दौरान सामने आया, जहां तेज बारिश, लंबे समय तक खुले गेट और ज्यादा पानी छोड़े जाने ने बांध के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। 2016 का रिकॉर्ड आठ साल बाद टूटा इस बारिश के सीजन में बीसलपुर बांध ने 167.929 टीएमसी पानी की आवक दर्ज की, जबकि 140.821 टीएमसी पानी की निकासी की गई। इससे पहले वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा 165.67 टीएमसी पानी की आवक और 134.238 टीएमसी पानी की निकासी हुई थी। तब यह आंकड़ा बांध के इतिहास में सबसे बड़ा माना गया था, लेकिन इस साल हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसी के साथ बीसलपुर बांध के इतिहास में पानी की आवक और निकासी का यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बन गया। एक ही साल में बना 11वां रिकॉर्ड इस सीजन बीसलपुर बांध पहले ही दस रिकॉर्ड बना चुका था। अब सबसे ज्यादा पानी की आवक और निकासी के साथ 11वां रिकॉर्ड भी जुड़ गया है। बांध के इतिहास में पहली बार इतने कम समय में इतने ज्यादा रिकॉर्ड बने हैं। बारिश की निरंतरता और तेज आवक ने बांध को लंबे समय तक लबालब बनाए रखा। नहरों में इस साल कम दिन छोड़ा जाएगा पानी पिछले साल की तुलना में इस साल नहरों में पानी कम दिनों के लिए छोड़ा जाएगा। गत वर्ष 22 नवंबर से 15 मार्च तक कुल 112 दिन नहरों में पानी छोड़ा गया था। इस बार करीब 80 दिन की देरी से 10 दिसंबर को नहरों में पानी छोड़ा गया। देरी के चलते नहरों में पानी की अवधि घटने की संभावना जताई जा रही है। बनास नदी में बहा इतना पानी कि साढ़े तीन बार भर जाता बांध इस साल बीसलपुर बांध के गेट कुल 134 दिन खुले रहे। इस दौरान 140.821 टीएमसी पानी बनास नदी में छोड़ा गया। यह मात्रा इतनी है कि इससे बीसलपुर बांध साढ़े तीन बार पूरा भर सकता था। लंबे समय तक गेट खुले रहने से यह रिकॉर्ड भी अपने आप में खास माना जा रहा है। दाईं नहर सबसे लंबी और अहम बीसलपुर बांध की दाईं नहर 51.6 किलोमीटर और बाईं नहर 18.65 किलोमीटर लंबी है। इन दोनों नहरों और करीब 750 किलोमीटर लंबी वितरिकाओं की मरम्मत और सफाई का काम तेजी से चल रहा है। इनके जरिए 81 हजार से अधिक क्षेत्रफल में उगी रबी की फसल और सब्जियों को सिंचाई का पानी मिलेगा। 2019 में 64 दिन खुले थे गेट, इस बार 134 दिन इस साल 24 जुलाई को बांध का पहला गेट खोला गया था। पानी की आवक बढ़ने पर कुछ समय के लिए अधिकतम आठ गेट खोले गए। बाद में एक गेट लगातार खुला रखा गया, जिसे 21 अक्टूबर को 90 दिन बाद बंद किया गया। इसके साथ ही लगातार 90 दिन पानी निकासी का रिकॉर्ड भी बना। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में फिर तेज बारिश होने पर 28 अक्टूबर को एक गेट दोबारा खोला गया, जिसे 4 दिसंबर को बंद किया गया। बारिश के कारण दो बार खुले गेट इस सीजन बारिश के कारण पहली बार जुलाई में गेट खोले गए और दूसरी बार अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में। 24 जुलाई से 21 अक्टूबर और फिर 28 अक्टूबर से 4 दिसंबर तक गेट खुले रहे। यह भी बीसलपुर बांध के इतिहास में पहली बार हुआ। अब तक आठ बार खोले जा चुके हैं गेट बीसलपुर बांध के गेट अब तक आठ बार खोले गए हैं। 2004 में पहली बार 26.18 टीएमसी पानी छोड़ा गया। इसके बाद 2006 में 43.25 टीएमसी, 2014 में 11.202 टीएमसी, 2016 में 134.238 टीएमसी, 2019 में 93.605 टीएमसी, 2022 में 13.246 टीएमसी, 2024 में 31.433 टीएमसी और इस साल 135 टीएमसी से ज्यादा पानी बनास नदी में छोड़ा गया। पेयजल और सिंचाई के लिए तय आरक्षण बीसलपुर बांध प्रोजेक्ट के एक्सईएन मनीष बंसल और एईएन दिनेश बैरवा के अनुसार टोंक जिले के लिए 8 टीएमसी पानी सिंचाई और 16.2 टीएमसी पानी पेयजल के लिए आरक्षित है। इसके अलावा 8.15 टीएमसी पानी वाष्पीकरण और अन्य खर्च के लिए माना गया है। 82 हजार हेक्टेयर में होती है सिंचाई बीसलपुर बांध और इसके नहरी तंत्र का निर्माण 2004 में पूरा हुआ था। टोंक जिले में दो मुख्य नहरों के जरिए कुल 81 हजार 800 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। दाईं नहर से 69 हजार 393 हेक्टेयर और बाईं नहर से 12 हजार 407 हेक्टेयर भूमि को पानी मिलता है। बांध अभी भी लगभग लबालब बीसलपुर बांध फिलहाल भी लगभग लबालब स्थिति में है और महज 20 सेंटीमीटर खाली हुआ है। इस साल बने रिकॉर्ड में दिसंबर में गेट खुले रहना, सबसे ज्यादा दिनों तक गेट खुले रहना, जुलाई और अक्टूबर में गेट खोलना, देरी से नहरों में पानी छोड़ना और सबसे ज्यादा पानी की आवक व निकासी जैसे कुल 11 रिकॉर्ड शामिल हैं। ये बने है इस साल सात रिकॉर्ड:


