हिमाचल के मंत्री विक्रमादित्य-अनिरुद्ध में जुबानी जंग:राजस्व मंत्री की अफसरशाही को नसीहत, बोला- जिनपर नियम बनाने का दायित्व, उन्हें ऐसे आक्षेप नहीं लगाने चाहिए

हिमाचल प्रदेश में मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अफसरों के शासक बनने के बयान पर घमासान छिड़ गया है। अनिरुद्ध और विक्रमादित्य की जुबानी जंग सियासी गलियारों में चर्चा का कारण बन गई है। अब कृषि मंत्री चंद्र कुमार के बेटे एवं पूर्व CPS नीरज भारती ने भी 60-70% अफसरों को कहा कि उन्हें हिमाचलियत से कोई सरोकार नहीं। इस बीच राजस्व मंत्री जगत नेगी ने IAS-IPS की प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- जिस तरह IPS ने मंत्री के साथ काम करने से इनकार किया, वह भी गलत है। उन्होंने कहा- हमें संयम बरतने की जरूरत है। जिनको नियम बनाने का दायित्व मिला, उन्हें ऐसे आक्षेप नहीं लगाने चाहिए। कुछ ही लोग हिमाचल के हितों की रक्षा कर रहे हैं यह कहना भी गलत है। ऐसी बातें होनी ही नहीं चाहिए थी। बता दें कि बीती शाम को हिमाचल की IAS-IPS एसोसिएशन ने भी मंत्री विक्रमादित्य के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस बीच, विक्रमादित्य सिंह ने भी सुक्खू के करीबी पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर तीखा जुबानी हमला बोला। उन्होंने अनिरुद्ध सिंह को NHAI अधिकारियों के साथ की मारपीट याद दिलाई। इससे सरकार की फूट खुलकर सामने आ गई है। अब सिलसिलेवार पढ़े, कैसे शुरू हुआ विवाद? मंडी रैली में डिप्टी सीएम ने भी अफसरशाही पर बोला था हमला दरअसल, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने 12 दिसंबर 2025 को अफसरशाही को मंडी रैली में चेतावनी दी थी। उन्होंने सीएम सुक्खू की तरफ इशारा करते हुए कहा- अफसरशाही से रात के अंधेरे में निपट होगा। प्रदेश में कांग्रेस सरकार होते हुए कुछ अफसर भाजपा नेताओं के घरों में हाजरियां भर रहे हैं। सुक्खू जी, ऐसे काम नहीं चलेगा, दोनों हाथों में डंडा उठाओं, अफसरों पर लगाम कसो, टाइम आ गया है। कोई हमे कुचलने की कोशिश करेगा तो हम उसे नेस्तनाबूद कर देंगे। भवानी पठानिया जंग में कूदे इस बीच कांग्रेस के मंत्री भवानी पठानिया भी देर रात इस जंग में कूद गए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा- खाकी संग खाकी मिले, कोट को नित टाई का साथ. कुर्ता होवै तार तार सदा, दूजे कुर्ते वाले के हाथ मतलब वर्दीधारी लोग आपस में एकजुट रहते हैं और एक-दूसरे का साथ देते हैं। अफसर भी हमेशा अफसर का ही साथ देता है। नेता या आम आदमी ही हमेशा फंसता है, उसकी हालत खराब होती है। राजनीति में नेता ही नेता एक-दूसरे को ही नुकसान पहुंचाते हैं।

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