खंडवा में जावर-सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए क्षेत्र के किसानों का आक्रोश शुक्रवार को सड़कों पर दिखाई दिया। किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और संबंधित कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। किसानों का आरोप है कि साल 2017 में सरकार द्वारा स्वीकृत जावर-सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना की लागत करीब 550 करोड़ रुपए है। इस योजना का टेंडर जीवीपीआर कंपनी को दिया गया था। योजना के तहत सिहाड़ा-जावर क्षेत्र के गांवों की करीब 26 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ना था। कार्य की समय-सीमा 2021 से 2024 तक तय की गई थी, लेकिन आज तक किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच पाया। घटिया काम और मिलीभगत का आरोप
किसानों का कहना है कि कंपनी और उसके पेटी कॉन्ट्रेक्टरों की मिलीभगत से पाइपलाइन डालने का कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। जगह-जगह पाइप लाइन में खामियां हैं, जिसके कारण योजना का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच सका। इससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भकराड़ा-जावर से निकली ट्रैक्टर रैली
इस मुद्दे को लेकर ग्राम भकराड़ा, जावर सहित आसपास के गांवों के किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। रैली पुलिस थाना जावर पहुंची, जहां किसानों ने थाना प्रभारी श्याम सिंह भादले को ज्ञापन सौंपकर कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के तहत मामला दर्ज करने और जांच समिति गठित करने की मांग की। जांच और कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि, वे पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं और इस योजना से उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं। खेतों में पानी पहुंचेगा और खेती में सुधार होगा, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण किसानों के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कंपनी और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ये लोग रहे मौजूद
प्रदर्शन और ज्ञापन के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपालसिंह पुरनी, कांग्रेस नेता सुनिल आर्य, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि रामपाल सिंह सोलंकी, किसान नेता चंदन सिंह पंवार, जनपद सदस्य बृजेंद्र सिंह पंवार, अश्विन सांवले सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।


