छत्तीसगढ़ के धमतरी में किसानों ने कलेक्ट्रेट में जोरदार किया। जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भौतिक सत्यापन के नाम पर अधिकारियों की ओर से जबरन रकबा समर्पित कराया जा रहा है। किसानों की मांग है कि इस प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपने गले में “हम चोर नहीं हैं” लिखे तख्ते पहन रखे थे। किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी समस्याओं से अवगत कराया। किसानों का कहना है कि अधिकारी बिना वैध दस्तावेज के घरों में घुसकर भौतिक सत्यापन कर रहे हैं और उन्हें चोर समझकर रकबा समर्पित करने का दबाव बना रहे हैं। किसानों ने इसे मानसिक उत्पीड़न बताया। प्रदर्शन के दौरान किसान धनेंद्र साहू ने अपने परिवार के साथ आत्मदाह की चेतावनी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना 10 से 12 एकड़ धान का रकबा समर्पित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उनका धान एक बार भी नहीं बिका है और सोसाइटी में उन पर लगभग डेढ़ लाख रुपए का कर्ज है। पांच से अधिक बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। 1 जनवरी तक धान नहीं बिका तो आत्मदाह की चेतावनी किसान धनेंद्र साहू ने चेतावनी दी कि यदि 31 जनवरी तक उनका धान नहीं बिकता है, तो वे अपने परिवार के साथ कलेक्टर परिसर में आत्मदाह करेंगे। वहीं, किसान रामायण सिन्हा ने कहा कि किसानों को चोर समझकर उनके धान का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सत्यापन पूरी तरह बंद किया जाए और 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी हो। ऑनलाइन-ऑफलाइन टोकन बंद, धान बेचने में परेशानी किसानों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के टोकन बंद कर दिए गए हैं। वैध कागजों के बिना घरों में प्रवेश किया जा रहा है, जिसके खिलाफ शिकायत की जाएगी। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष लाला चंद्राकर ने कहा कि भौतिक सत्यापन के नाम पर किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गिरदावरी हो चुकी है, फिर भी भरोसा नहीं किया जा रहा। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि भौतिक सत्यापन बंद नहीं हुआ तो आंदोलन का स्वरूप क्रांति में बदल जाएगा।


