सिटी रिपोर्टर | बीकानेर डिमेंशिया, भूलने की बीमारी का नाम है। काम देखकर लगता है नगर निगम इन दिनों इसी बीमारी से पीड़ित है। कहीं गड्ढा खोदकर भूल गया, कहीं नाला साफकर करके ढकना तो कहीं सड़क बनाकर बैरिकेडिंग हटाना भूल गया। ऊंट उत्सव के बाद हजारों सैलानी जूनागढ़ पहुंचे। आसपास के रास्तों से होकर गुजरे। यहां की व्यवस्था देख वे ना सिर्फ निराश हुए बल्कि बीकानेर की अलग ही छवि लेकर गए। नगर निगम ने जूनागढ़ से सटा नाला साफ कराया मगर उसके बाद उसे ढकना भूल गया। जूनागढ़ से निगम वाली रोड पर एक साइड नाला खुला हुआ है। फर्नीचर वाली रोड सीसी तो बना दी मगर जूनागढ़ वाली रोड से कनेक्ट नहीं किया तो दीनदयाल सर्किल से एमएम हॉस्पिटल की रोड खोदकर महीनों से छोड़ रखा है। फर्नीचर वाली रोड सीसी बनाते वक्त जब सीवरेज जाम हुई तो नगर निगम ने इस पानी को निकालने के लिए जूनागढ़ के किनारे का नाला साफ कराया। कई दिनों तक नाला साफ हुआ मगर अब उसे ढकना भूल गए। ये वो रास्ता है जहां से रोज करीब लाखों लोग निकलते हैं। एक साइड खुला नाला जहां रात के अंधेरे में कोई बाइक समेत गिर सकता है। चौपहिया वाहन भी फंस सकता है। फैरोकवर से इसे ढकना था मगर अभी वो खुला हुआ है। फर्नीचर वाली रोड आखिरकार दो साल बाद बनी। रोड पर गलियों का ट्रैफिक भी चालू हो गया मगर जूनागढ़ से जाने पर इस रोड पर अभी नहीं चढ़ सकते क्योंकि सीसी रोड का मुख्य मार्ग से लिंक नहीं किया गया। करीब 8 फीट चौड़ी सड़क अधूरी छोड़ दी गई। हैरानी की बात ये कि अब यहां काम भी नहीं हो रहा जिससे ये उम्मीद हो कि सड़क आपस में कनेक्ट कर दी जाए। खुली नाली बहती हुई दिख रही है। इससे इस रोड के बनने का अभी तक आम आदमी को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। यहां दिक्कत ये भी है कि पहले जो नाला मरम्मत का काम हुआ था अभी तक उसी के बिल का मामला नहीं सुलझा। इसलिए यहां नया टेंडर भी नहीं हो रहा। एक्सईएन ने दावा तो किया काम दूसरी फर्म करेगी मगर कब इसका कोई जवाब नहीं। फोर्ट डिस्पेंसरी के सामने नाला खतरा फोर्ट डिस्पेंसरी के सामने सीवरेज का काम होने के बाद फर्म ने जहां गड्ढा खोदा वहां पैचवर्क करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी। यहां नाले के ऊपर बना जाल खतरे का प्वाइंट बना है। ये जाल सड़क से दो फीट नीचे है। वो भी झूलता हुआ। जूनागढ़ के सामने से 60 फीट रोड आ रही मगर नाले के पास वो 30 फीट ही रह जाती है क्योंकि बाकी जगह में नाले के ऊपर जाल है जो सड़क से नीचे है। ये बारिश के दिनों के अलावा रात में खतरे का प्वाइंट बना है। ^सफाई शाखा ने नाला साफ किया है तो उसे ही फैरोकवर रखने हैं। रही बात नाला मरम्मत की तो जब तक पुराने टेंडर का कोई हल नहीं निकलेगा तब तक दूसरा टेंडर यहां नहीं लगा सकता। – चिराग गोयल, एक्सईएन निगम


