लुधियाना| थाना मेहरबान इलाके में जली और दो टुकड़ों में कटी लाश मिलने के सनसनीखेज मामले को लुधियाना पुलिस ने सुलझा लिया है। मृतक की पहचान संजय सिंह उर्फ सनी (42) निवासी ग्यासपुरा के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि बहन को लंबे समय से परेशान किए जाने से नाराज युवक ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर 42 वर्षीय व्यक्ति की हत्या की थी। जिन्होंने पहचान मिटाने को शव जलाकर 15 किलोमीटर दूर खाली प्लॉट में फेंका था। पुलिस के अनुसार, वारदात 3 जनवरी को हुई थी, जबकि 5 जनवरी की देर रात शव बरामद हुआ। पुलिस ने विभिन्न थानों में दर्ज गुमशुदगी रिपोर्टों की जांच शुरू की। उन्हें साहनेवाल में संजय सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। वह 3 जनवरी को दोपहर में घर से निकला था। इस आधार पर पुलिस ने सीआईए-1 समेत विशेष जांच टीमों का गठन किया। जांच में खुलासा हुआ कि हत्या की साजिश मुन्ना कुमार (30) ने रची थी। क्योंकि संजय उसकी बहन को 5 साल से परेशान कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, 3 जनवरी की शाम करीब 7 बजे आरोपियों ने संजय को मिलने के बहाने ग्यासपुरा में राजेश कुमार (33) के किराए के कमरे पर बुलाया। जहां तीनों ने रॉड से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने शव के दो टुकड़े किए और 4 जनवरी की रात धुंध का फायदा उठाते हुए बाइक से शव को कक्का धौला रोड स्थित खाली प्लॉट में ले जाकर पेट्रोल और नायलॉन के कपड़े से जला दिया। आरोपियों ने मृतक की जेब से 50 हजार रुपये नकद और एटीएम कार्ड निकालकर 10 हजार रुपये भी निकाले। जांच में यह भी सामने आया कि राजेश कुमार का संजय से पैसों के लेनदेन का विवाद था। तीसरा आरोपी मंगल सिंह (28) हाल ही में जेल से बाहर आया था। पुलिस ने तीनों आरोपियों को 16 जनवरी को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयोग लोहे की रॉड, मृतक की बाइक और वारदात में इस्तेमाल वाहन बरामद कर लिए हैं। भास्कर इनसाइट- 20 कैमरे खंगाल भाई ने ढूंढा कातिल बाइक पर दिखा हमलावर आरोपियों ने 3 तारीख को संजय का कत्ल कर एटीएम से 10 हज़ार रुपए निकलवाए। जब हमने स्टेटमेंट देखी तो एटीएम की फुटेज देखने के लिए चंडीगढ़ के रिश्तेदार को संपर्क किया। आरोपी एटीएम के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गए। जिसके बाद अपने तौर पर ही आरोपी की पहचान की। आरोपी 5 साल से जानता था तो इसलिए मुंह पर मफलर बांधे होने के बावजूद उसे पहचान लिया। हमने आरोपी के घर के बाहर की वीडियो निकलवाई तो कपड़े सेम होने से पक्की पहचान हो गई। गयासपुरा चौंकी ने हमारा बिलकुल सहयोग नहीं दिया। एक होम गार्ड 2-3 दिन हमारे साथ आया बाद में उसने भी कोई मदद नहीं की। हमने कमिश्नर को शिकायत दी तो केस सीआईए को सौंपा गया। जिन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। हमें हैरानी हुई कि 6 साल पुराने दोस्त भी ऐसा कर सकते हैं। लास्ट कॉल उन्हीं की होने से हमें यकीन था। हमने यह भी पता करवाया कि 2 से 13 तारीख तक मुन्ना भी छुट्टी पर था। उसे भी हमने ही पकड़वाया। – जैसा जितेंदर सिंह ने भास्कर को बताया (मृतक का भाई)


