भास्कर फोटो इन्वेस्टिगेशन सरकारी स्कूलों से निकली ये तस्वीरें बच्चों के आहार पर घोर प्रशासनिक लापरवाही दिखाती हैं। पन्नाधाय बाल गोपाल योजना में राजस्थान के 68 हजार स्कूलों के 54 लाख बच्चों को सालाना 722 करोड़ रु. का दूध बांटा जा रहा है। कई स्कूलों में यह दूध बच्चों ने नहीं पीया। एक्सपायर हो गया, फेंक रहे हैं। मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग में पीएम पोषण (मिड-डे मील) को बेहतर ढंग से लागू करने के निर्देश दिए थे। भास्कर रिपोर्टर ने स्कूलों में योजना की हकीकत और सीएस के निर्देश की गंभीरता को देखा। सरकार का पैसा गया, मगर बच्चों को पोषण नहीं मिला। पैसे और दूध की बर्बादी का जिम्मेदार ही तय नहीं। सलूंबर के राउमावि बस्सी के प्रिंसिपल मुकेश भगवान त्रिवेदी ने बताया- स्कूल में 4 माह से दूध सप्लाई नहीं है। ब्लॉक के कई स्कूलों में नहीं आया। राज्य में कई स्कूलों में भी दूध पाउडर की सप्लाई नहीं हो रही है। माधोराजपुरा : गहलोत सरकार में बांटा दूध बंटा नहीं, कोठियों में ही सड़ गया भास्कर संवाददाता प्रा. स्कूल, जयनगर पहुंचा। यहां टीचर से मिड डे मील रखा कमरे का ताला खुलवाया। पता चला मिल्क पाउडर के कई पैकेट्स अनाज वाली कोठी में बंद हैं। इन पैकेट्स पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फोटो हैं। यानी ये पैकेट दो साल से ज्यादा पुराने हैं। टीचर ने बताया कि नामांकन घटा तो दूध पाउडर रह गया। अफसरों को इस बारे में बता दिया था। इसलिए हो रहा दूध खराब {स्कूलों में नामांकन में कमी। {स्टाक दूसरे स्कूलों में नहीं भेजा। {स्कूल बंद, सप्लाई लेते रहे। {कई बच्चे नहीं पीते पाउडर का दूध। राप्रावि पलई टोंक में पीईईओ बोले- मुझे तो इसका पता ही नहीं, आपने बताया यहां मौजूदा सरकार का बांटा मिल्क पाउडर खराब हो चुका। टीचर ने बताया- पिछले सत्र से नामांकन शून्य हो गया। पीईईओ को बता दिया था। पीईईओ पपूलाल बोले-मुझे तो पता ही नहीं। गंभीर मामला है, दिखवाते हैं। डीईओ के निर्देश पर जो भी होगा कार्रवाई करेंगे। समुचित आहार नहीं मिलने से 2.34 लाख बच्चे कुपोषित पहली से 8वीं तक के बच्चों को दूध देते हैं। पिछली सरकार में बाल गोपाल योजना थी, अब पन्नाधाय बाल गोपाल योजना। कक्षा 5वीं तक 150 मिलीलीटर, छठीं से आठवीं तक 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है। आपूर्ति आरसीडीएफ करता है। सी.सै. स्कूल, चित्तौड़ा (जयपुर): गड्ढे में 54 किलो मिल्क पाउडर दबाया इस स्कूल में पिछली सरकार और वर्तमान सरकार में बांटें पैकेट गड्ढे में दबाए। प्रिंसिपल कैलाश चौधरी कहते हैं- सीबीईओ के निर्देश पर डिस्पोज कि है। 15 सितंबर के बाद सप्लाई नहीं आई। स्कूल में डेढ़ सौ बच्चे हैं। शिक्षा विभाग में दूध योजना में पैसे की बर्बादी


