जयपुर विकास प्राधिकरण:रीजन 35 से बढ़ाकर 70 किलोमीटर किया, प्रवर्तन शाखा में 27 जोन, ईओ सिर्फ 8, पांच के पास 3-3 जोन

सरकार ने जेडीए का दायरा 7 हजार वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाकर जोन की संख्या 27 कर दी, लेकिन मैनपावर की किल्लत दूर नहीं करने से परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। जेडीए रीजन में अवैध निर्माण रोकने व मास्टर प्लान की पालना करवाने वाली प्रवर्तन शाखा के बुरे हाल हैं।शहरी क्षेत्र के साथ-साथ रीजन के नए इलाकों में दूदू, फागी, कोटखावदा, विराटनगर, चाकसू, जमवारामगढ़, बस्सी तक केवल 8 प्रवर्तन अधिकारियों के भरोसे ही काम करना पड़ रहा है। एक प्रवर्तन अधिकारी के पास 3-3 जोन का जिम्मा है। कई प्रवर्तन अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें एक छोर पर आगरा रोड, दूसरे छोर पर बगरू, मुहाना की जिम्मेदारी दे रखी है। ऐसे में अवैध निर्माण-कालोनियों की शिकायतों का निस्तारण समय पर नहीं हो पा रहा और पेंडेंसी बढ़ती जा रही है। प्रवर्तन शाखा के कई जोन में 50-50 शिकायतें पेंडिंग हैं। जेडीए के उच्चाधिकारी ईओ लगाने को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। मास्टर प्लान बनने से पहले ही नए रीजन में बस रही अवैध कालोनियां राज्य सरकार ने दूदू, फागी, कोटखावदा, विराटनगर, चाकसू, जमवारामगढ़, बस्सी, फुलेरा, किशनगढ़ रेनवाल सहित 17 तहसील, 4 नगरपालिका और 693 गांवों को जेडीए रीजन में शामिल किया था। जेडीए को अब 2047 का मास्टर प्लान इन नए इलाकों को शामिल करते हुए तैयार करना है, लेकिन जेडीए रीजन में शामिल होते ही अवैध कालोनियां बसना शुरू हो गईं। हाल में जेडीए ने नए रीजन में आधा दर्जन अवैध कालोनियों को ध्वस्त किया था। आईजी राहुल कोटोकी ने बताया कि जोन की संख्या के अनुसार प्रवर्तन अधिकारियों की संख्या कम है, पुलिस विभाग को नए अधिकारी लगाने के लिए पत्र लिखा है। ईओ के पास जोन का जिम्मा जोन में दूरी 40 किमी तक जेडीए में 18 जोन थे, तब रोज 15 से 20 शिकायतें मिलती थीं। 27 जोन होने से रोज औसत 50 से 60 शिकायतें मिल रही हैं। एक जोन से दूसरे जोन की दूरी भी 40 से 50 किमी तक है। वहीं, जेडीए रीजन के एक सिरे से दूसरे सिरे की दूरी औसतन 60 से 70 किमी है। ऐसे में शिकायतों की संख्या बढ़ रही है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *