प्रदेश में झोला छाप डॉक्टर की अब खैर नहीं है। साथ ही निजी दंत अस्पताल में मरीज का गलत इलाज करने और अनुचित व्यवहार करना भारी पड़ सकता है। मरीज या परिजन की ओर से शिकायत करने पर जांच में मामला सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल (आरएसडीसी) जयपुर ने 44 दंत चिकित्सक और एक विधि विशेषज्ञ समेत एथिक्स कमेटी का गठन किया है। जिसमें दस जिलों से अनुभवी और स्थानीय डेंटिस्ट को एथिक्स कमेटी में सदस्य नियु्क्त किया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल में 12 हजार से ज्यादा दंत चिकित्सक पंजीकृत हैं। राजस्थान स्टेट काउंसिल में 12 हजार से ज्यादा दंत चिकित्सक हैं पंजीकृत एथिक्स कमेटी के सदस्य डॉ. संदीप मीणा के अनुसार कमेटी का मुख्य कार्य पंजीकृत दंत चिकित्सक पेशेवर आचरण और नैतिकता के मानकों का पालन करें। डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली से मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही बीडीएस या एमडीएस की डिग्री लेकर प्रेक्टिस करने वाला ही योग्य दंत चिकित्सक माना जाता है। साथ ही जिस राज्य में प्रेक्टिस कर रहा है, उसकी स्टेट डेंटल काउंसिल में पंजीकृत व नवीनीकरण अनिवार्य है। अन्यथा वह झोलाछाप की श्रेणी में ही माना जाता है। ऐसे रहेगी नजर एथिक्स कमेटी में डॉ. एच.एल.गुप्ता (अध्यक्ष,आरएसडीसी),डॉ.संकल्प मित्तल, डॉ. कुलदीप तिवारी, डॉ. हरीश भारद्वाज, डॉ. जतिन्द्र सिंह वालिया, डॉ. आलोक भारद्वाज, डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा, डॉ. उमेश हिमानी, डॉ. एसआर. चौधरी, डॉ.किशोर वर्मा, डॉ.अंशुल मोहन माथुर, डॉ.प्रदीप शर्मा समेत जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, भीलवाड़ा, भरतपुर, अलवर, जैसलमेर, दौसा, सीकर जिलों के 44 सदस्य नियुक्त हैं। इनकी स्थानीय स्तर पर नजर रहेगी। स्टेट काउंसिल को किसी तरह की शिकायत आने पर स्थानीय स्तर पर जांच करके आरएसडीसी को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। विशेषज्ञों से राय लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी। “दंत चिकित्सकों की क्वालिटी मेंटेन रखने और झोलाछाप पर नियंत्रण के लिए एथिक्स कमेटी का गठन कर जिलों से 40 से अधिक दंत चिकित्सकों को शामिल किया है। इससे जांच करके कार्रवाई करना आसान होगा।”
-डॉ.संकल्प मित्तल, रजिस्ट्रार, राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल


