समाज में महिलाओं की आबादी 50 प्रतिशत है, अतः बगैर महिलाओं की सहभागिता के विकास की कल्पना ही असंगत है। इंदौर शहर तथा समाज के विकास के लिए महिलाओं में स्वतंत्रता पूर्वक विचार करने की क्षमता विकसित करना और उनकी प्रभावी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए लड़कियों को शिक्षित करें तथा सुरक्षित सामाजिक परिवेश बनाएं। पारिवारिक एवं सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को सहेजा जाए। समाज एवं शासन से अपेक्षा करने के बजाय महिलाएं आर्थिक सामाजिक कार्यों में स्वयं आगे आए। विभिन्न वक्ताओं ने डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा जाल सभागृह में शहर की प्रबुद्ध महिलाओं के लिए आयोजित चर्चा में यह बात कही। महिलाओं में असुरक्षा एवं साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे “शहर के विकास में चुनौतियां एवं महिलाओं की सहभागिता ” विषय पर प्रसिद्ध महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम माथुर ने कहा कि महिलाओं में असुरक्षा एवं साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। लड़कियों में जागरूकता की कमी होने से आसानी से अपराधियों की जाल में फंस जाती है अतः उन्हें स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न जानकारियां एवं प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। महिलाएं, परिवार की महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, अतः परिवार में सभी को साथ लेकर चले यह जरूरी है। पूरी तरह से नियोजित विकास नहीं हो पा रहा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रेखा आचार्य ने कहा कि पूरी तरह से नियोजित विकास नहीं हो पा रहा है। विकास कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन हो। महिलाओं की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए। नेहा जैन ने कहा कि महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में अपने स्तर पर,मोहल्ला समितियां बनाए तथा बच्चों को संस्कारित करने का कार्य भी करें। जयश्री पिंगले ने कहा कि शहर, तेजी से विकास कर रहा है, बाहर से अपने सपने पूरे करने के लिए बच्चे आ रहे हैं, किंतु वे अपर्याप्त सुविधाओं, शोषण एवं नशे के षड्यंत्रों का शिकार हो रहे हैं, कानून व्यवस्था कमजोर हो रही है। ज्यादा व्यवसायीकरण होने के कारण, ज्यादा अपराध बढ़ रहे हैं। ,शहर के हित में सोचने वाले, गंभीर तथा संवेदनशील नेतृत्व की कमी होती जा रही है। साथ बैठने, साथ खाना खाने की प्रवृत्ति खत्म हो रही प्रो शोभा वैद्य ने कहा कि वर्तमान दौर में परिवार में साथ बैठने, साथ खाना खाने की प्रवृत्ति खत्म हो रही है, बल्कि पाश्चात्य संस्कृति हरेक क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है, जिसके कारण घर का संपूर्ण वातावरण खराब रहा है। महिलाओं को स्वतंत्रता पूर्वक विचार करने की क्षमता विकसित करना सबसे महत्वपूर्ण है। बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया, मोबाइल का अतिरेक, विकास प्रक्रिया में संस्कृति और जीवन शैली की उपेक्षा एवं विकास के नाम पर सिर्फ सीमेंटीकरण और निर्माण ही पर्याप्त नहीं है। समावेशी एवं सहभागिता पूर्ण विकास के लिए महिलाओं की भागीदारी, सम्मान, सुरक्षा, सुविधाओं को विस्तृत करना चाहिए । नशे की प्रवृत्ति से रोकना, शासकीय विद्यालयों में शिक्षा को बढ़ावा देना, बस्तियों में शिक्षा का प्रसार, राजनीति में महिलाओं को वास्तविक तरीके से नेतृत्व का अवसर हेतु प्रयास, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आदि विषयों पर भी चर्चा की गई। बैठक में लिली डावर, पूर्व पार्षद पदमा भोजे, डॉ वंदना तारे, प्रो रंजना नाईक, श्वेता गुप्ता, रेहाना खान, श्रमिक नेत्री सुशीला यादव, पर्यावरण विद् मेघा बर्वे ,डॉ. रंजना सहगल आदि ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में डेवलपमेंट फाउंडेशन के मेनेजिंग ट्स्टी आलोक खरे ने विषय की प्रस्तावना एवं भूमिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम में शफी शेख़, प्रणिता दीक्षित, अशोक मित्तल आदि भी उपस्थित थे। संचालन श्याम पांडे ने किया। रामेश्वर गुप्ता ने आभार व्यक्त किया।


