मनासा के वार्ड-15 और वार्ड-6 में सन्नाटा पसरा है। दो घरों में बच्चों की आवाजें हमेशा के लिए थम गई हैं। दीवारों पर टंगे स्कूल बैग अब रोज सुबह कंधों पर नहीं चढ़ेंगे। इन्हें पहनकर स्कूल जाने वाले मासूम अब लौटकर नहीं आए। गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) ने मनासा के 13 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। इनमें से दो मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। बाकी 11 मरीजों में दो की उम्र 21 और 35 साल है। बाकी सभी 4 से 17 साल के बच्चे हैं। इनमें दो बच्चे अब भी जीबीएस से जूझ रहे हैं। अन्य की हालत में सुधार है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने 7 मरीजों में जीबीएस की पुष्टि की है। छह मरीजों को संदिग्ध माना गया है। बाहर इलाज करा रहे इन छह मरीजों के परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने उनमें भी जीबीएस की पुष्टि की है।
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि अधिकतर मरीजों को जीबीएस से पहले सर्दी और बुखार हुआ था। 8 मरीजों को 21 से 27 दिसंबर के बीच वायरल संक्रमण हुआ। इसके बाद दिसंबर के आखिरी दिनों और जनवरी के पहले सप्ताह में जीबीएस के लक्षण सामने आए। इससे संकेत मिलते हैं कि वायरल संक्रमण के बाद ही बीमारी ने गंभीर रूप लिया। वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि जीबीएस किस कारण फैला। इनका चल रहा इलाज बड़ा सवाल… जीबीएस किस कारण फैला, किसी को नहीं पता? सोनू के परिजन बोले- प्रयास करने के बाद भी बेटे को नहीं बचा सके सोनू सोनी(15)… मनासा के निवासी सोनू सोनी अपने परिवार का इकलौता बेटा था। जीबीएस ने परिवार का चिराग बुझा दिया। पिता पूरण सोनी बताते हैं कि इलाज के हर प्रयास किए गए, लेकिन बेटा नहीं बच सका। अब घर में सिर्फ उसकी यादें बची हैं। दादा गुमसुम; मां, बेटे की तस्वीर से लिपटकर रो रही केशव देतवाल(6)… सिपाही मोहल्ला निवासी कृतिकेष उर्फ केशव परिवार का इकलौता बेटा था। वह यूकेजी का छात्र था। पिता अर्जुन देतवाल तीन दिन पहले ही कैंसर का इलाज कर लौटे हैं। उनका ऑपरेशन हुआ है। बेटे की मौत से परिवार टूट गया है। दादा गुमसुम हैं, मां बेटे की तस्वीर से लिपटकर रोती रहती हैं। 2200 घरों का सर्वे किया… 25 से अधिक स्थानों से लिए पानी के सैंपल उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह के मुताबिक, मनासा नगर में 25 से अधिक स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए हैं। पानी की जांच में अब तक कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। आगे भी जांच कराई जाएगी। नगर में अब तक 2200 घरों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को दूसरे चरण का सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सर्दी, खांसी और बुखार के मरीजों की पहचान कर उनका इलाज किया जाएगा। कोई नया मरीज सामने नहीं आया है। स्थिति नियंत्रण में है। दूषित पानी और अधपके चिकन से यह शरीर में जाता है


