भरतपुर के रूपवास थाने में दर्ज हत्या के मामले में सजा की जानकारी मिलते ही फरार हुआ आरोपी माखन सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। आरोपी को साल 2005 में भगोड़ा घोषित किया गया था और वह पिछले कई सालों से उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अपने परिवार के साथ छुपकर रह रहा था। चार दिन पहले मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने उसे शनिवार को सुबह गिरफ्तार कर लिया। चार दिन पहले मिला इनपुट, बनाई गई टीम ASI होरी लाल गुर्जर ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। चार दिन पहले सूचना मिली थी कि माखन सिंह आगरा के कंदौली इलाके में रह रहा है। इसके बाद मुखबिर के जरिए उसकी पहचान की पुष्टि की गई और टीम को दबिश के लिए रवाना किया गया। रात में घर पहुंची पुलिस, सो रहा था आरोपी पुलिस टीम देर रात आगरा पहुंची और माखन सिंह के घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया। उस समय आरोपी अपने परिवार के साथ घर में सो रहा था। दरवाजा खुलते ही परिजनों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। एक घंटे की समझाइश के बाद गिरफ्तारी परिजनों के विरोध के बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें वारंट दिखाया और कानूनी स्थिति समझाई। माखन सिंह को भी वारंट दिखाया गया। करीब एक घंटे तक चली समझाइश के बाद आरोपी पुलिस के साथ आने के लिए तैयार हुआ, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। 1992 में खेत विवाद में हुई थी हत्या ASI होरी लाल गुर्जर ने बताया कि मामला साल 1992 का है। रूपवास और यूपी के खेरागढ़ बॉर्डर के पास स्थित एक खेत को लेकर विवाद चल रहा था। शिवराम उस खेत पर खेती कर रहा था। इसी दौरान माखन सिंह अपने पिता नत्थी और चाचा गोकुला, करण सिंह व राम भरोसी के साथ मौके पर पहुंचा और शिवराम को खेती करने से मना किया। विरोध करने पर मारी गोली, मौके पर मौत जब शिवराम ने विरोध किया तो माखन सिंह ने कट्टा निकालकर उस पर गोली चला दी। गोली लगने से शिवराम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई। सजा का अंदेशा होते ही फरार हुआ माखन साल 1998 में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने की स्थिति बनते ही माखन सिंह और उसका चाचा करण सिंह कोर्ट नहीं पहुंचे और फरार हो गए। वहीं राम भरोसी और नत्थी सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जेल में रहते हुए राम भरोसी की मौत हो गई, जबकि फरारी के दौरान करीब 15 साल पहले करण सिंह की भी मृत्यु हो चुकी है। 500 रुपए इनाम, 2005 में भगोड़ा घोषित माखन सिंह पर साल 1998 में 500 रुपए का इनाम रखा गया था, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। लगातार प्रयासों के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने पर साल 2005 में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। अब 25 साल बाद पुलिस ने उसे आगरा से गिरफ्तार कर लिया है।


