श्योपुर के गांधी पार्क में शनिवार को कांग्रेस ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम और कानून में किए गए बदलावों के विरोध में एकदिवसीय उपवास रखा। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर भी प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों पर गरीब, मजदूर और आम नागरिकों की अनदेखी का आरोप लगाया। उपवास स्थल पर कांग्रेस नेता दौलतराम गुप्ता ने मनरेगा में हुए बदलावों पर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के नाम और मूल कानूनों में ऐसे संशोधन किए हैं, जिनसे गरीब मजदूरों को मिलने वाले अधिकार और लाभ कमजोर हुए हैं। गुप्ता ने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक रोजगार प्रदान करना था, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियों से यह प्रभावित हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 23 मौतों को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस त्रासदी के प्रति असंवेदनशील है और जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह घटना केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। उपवास के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधा गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मंत्री अहंकारी हैं और उन्हें इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि भागीरथपुरा हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। कांग्रेसियों ने इंदौर त्रासदी के पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की। उपवास के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि मनरेगा के मूल स्वरूप को बहाल नहीं किया गया और जल त्रासदी के दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा की मानसिकता महात्मा गांधी के विचारों के विपरीत है। इसलिए, पार्टी ने मांग की कि मनरेगा योजना और उसके मूल कानूनों को बिना किसी बदलाव के लागू किया जाना चाहिए।


