बालाघाट में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदले जाने के विरोध में कांग्रेस ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया है। इसी कड़ी में शनिवार को गांधी प्रतिमा के पास उपवास आंदोलन किया गया। इस दौरान इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों पर भी विरोध जताया गया। कांग्रेस ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘वीबीजी रामजी’ किए जाने का विरोध किया। हालांकि, एआईसीसी के निर्देश पर आयोजित इस उपवास आंदोलन में विधायकों और कांग्रेसियों की कम उपस्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय रही। कांग्रेस अध्यक्ष ने 30 जनवरी को मनरेगा पर होने वाले आंदोलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने का भरोसा दिलाया है। उपवास आंदोलन में बैठे कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक संजय उइके ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार ने ग्राम स्वराज की कल्पना के साथ मनरेगा योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य गांव के किसानों, मजदूरों और गरीबों को लाभ पहुंचाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अब इस योजना का नाम बदलने जा रही है। उइके ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध ‘राम’ नाम से नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि मनरेगा योजना को यथावत रखा जाए और सरकार राम के नाम पर कोई नई योजना चलाए। उन्होंने भाजपा पर धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि महात्मा गांधी से नाराजगी के कारण ही मनरेगा का नाम बदलकर ‘वीबीजी रामजी’ किया गया है। विधायक अनुभा मुंजारे ने केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर महात्मा गांधी के विचारों को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर मोदी सरकार महात्मा गांधी के सम्मान को कम करना चाहती है, उनके नाम को समाप्त करना चाहती है और उनकी विचारधारा पर आघात पहुंचा रही है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की ‘बीमार मानसिकता’ का परिचायक बताया।


