भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याणक पर हुआ मस्तकाभिषेक:1008 कलशों से जलाभिषेक, निर्वाण लाडू चढ़ा;

बड़वानी। विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक पर महा मस्तकाभिषेक किया गया। माघ कृष्ण चतुर्दशी को 84 फीट ऊंची प्रतिमा का 1008 कलशों से जलाभिषेक हुआ। वार्षिक मेले में पहली बार तीन आचार्यों का सानिध्य प्राप्त हुआ। शनिवार को तलहटी मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम की पूजन संपन्न हुई। इसके बाद मुनि संघ, आचार्य संघ और अन्य त्यागी वृत्तियों की आहार चर्या हुई। तलहटी से बड़े बाबा तक भव्य शोभा यात्रा बैंड बाजों के साथ निकाली गई। पहाड़ के नीचे पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान किया गया। इनमें प्रथम कलश पुण्यार्जक नेमि कुमार जैन मुंबई, निर्वाण लाडू पुण्यार्जक दिनेश जैन कठलाल गुजरात, विधान पुण्यार्जक अशोक विनोद दोषी परिवार बाकानेर, शांति धारा पुण्यार्जक अनिल सुनील जैन, शरद कुमार शांतिलाल कोटड़िया, गजेन्द्र मीना झांझरी बड़ौदा, महेंद्र पाटनी टोकी और ध्वजारोहणकर्ता स्नेहलता तेज कुमार विनायका उज्जैन शामिल थे। इन सभी का आचार्य संघ के सानिध्य में अंग वस्त्र, तिलक और माला से सम्मान हुआ। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट और पाद प्रक्षालन का सौभाग्य जितेंद्र कुमार देवेंद्र कुमार गोधा बड़वानी को प्राप्त हुआ। सभा का संचालन विपुल गंगवाल मानवर ने किया। ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष विनोद दोशी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में क्षेत्र से संबंधित जानकारी दी। मुनिश्री प्रणुत सागर जी ने कहा कि यह कार्य भगवान की आज्ञा और आशीर्वाद से संपन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि द्रव्य सबके पास होता है, किंतु जिन शासन की प्रभावना के लिए दान देने की श्रद्धा, क्षमता और साहस हर किसी के पास नहीं होता। मुनिश्री ने आगे कहा कि अभिषेक, शांतिधारा और निर्वाण लाडू चढ़ाना पुण्य की महिमा है। उन्होंने भगवान आदिनाथ और आचार्य पुष्पदंत जैसे संतों के आशीर्वाद से सभी कार्यों के संपादित होने की बात कही। इस क्षेत्र से साढ़े पांच करोड़ मुनिराज मोक्ष गए हैं, जिनकी वर्गणा पूरे निमाड़ को मिल रही है।

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