IPS सर्विस मीट का दूसरा दिन:स्पोर्ट्स और कल्चरल एक्टिविटी में शामिल हुए अफसर, CPR की ट्रेनिंग भी ली

भोपाल में IPS सर्विस मीट का दूसरा दिन शनिवार को इंटरटेनमेंट गेम्स और मनोरंजन कार्यक्रमों के नाम रहा। प्रदेशभर से आए IPS अधिकारियों और उनके परिवारों में इस मीट को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह सभी अधिकारियों एवं उनके परिजनों के लिए संभाला रिजॉर्ट में खेलकूद और अन्य स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों को ब्लू, रेड, ग्रीन और येलो टीम में विभाजित किया गया। स्पर्धाओं में रस्साकशी, हुला हूप, फन अंताक्षरी और बैलून गेम शामिल रहे, जिनमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों के लिए भी अलग-अलग स्पर्धाएं आयोजित की गईं, जिनका उन्होंने भरपूर आनंद लिया। इसके बाद सभी अधिकारियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण भी दिया गया। पहले दिन डीजीपी ने गाया मैं निकला गड्‌डी लेके…
सर्विस मीट के पहले दिन आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों का अलग ही रंग देखने को मिला। डीजीपी कैलाश मकवाना ने फिल्म गदर का मशहूर गीत “मैं निकला गड्डी लेके, रस्ते में यूं… सड़क पे एक मोड़ आया, मैं उत्थे दिल छोड़ आया…” गाकर पुलिस अधिकारियों में जोश भर दिया। वहीं] डीजीपी कैलाश मकवाना और पूर्व डीजीपी सुधीर सक्सेना ने अपने परिवार के साथ फिल्म जय हो का गीत गाकर देशभक्ति का माहौल बना दिया। इस दौरान पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। पहले दिन मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सर्विस मीट का शुभारंभ किया था। उन्होंने एमपी में फैले नक्सलवाद की सांप से तुलना की थी। कहा था कि एक कमरे में मखमल के गद्दे पर किसी को सोने के लिए कह दिया जाए और उस कमरे में सांप घूमते रहें तो यह कैसे हो सकता है कि कोई आसानी से सो सके। हमारे लिए यह गौरव की बात है कि पुलिस ने इस समस्या को समझा और सांप का फन कुचलकर नक्सल मूवमेंट को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार और व्यक्तिगत जिंदगी को छोड़ पुलिस लोगों के लिए काम करती है। हमारे भारत की पुलिस अनुशासन की उत्कृष्ट मिसाल है। सीएम यादव ने कहा कि आजादी के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ही आजाद हुए, लेकिन पाकिस्तान में कभी भी तख्ता पलट हो जाता है। हमारे यहां आईएएस, आईपीएस अफसरों ने लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सारे विभाग महत्वपूर्ण हैं लेकिन पुलिस की चुनौतियां अलग हैं।

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