भास्कर न्यूज |महुआडांड़ सरकारी योजनाओं के काग़ज़ी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच फंसी एक और महत्वाकांक्षी परियोजना प्रखंड के चैनपुर गांव में दम तोड़ती नजर आ रही है। वर्ल्ड बैंक सहायता से करोड़ों रुपये की लागत से बनाया जा रहा बिजली सब-स्टेशन, आठ वर्षों बाद भी चालू नहीं हो सका है और अब यह भ्रष्टाचार, लापरवाही और संवेदक की उदासीनता का प्रतीक बन चुका है। झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड द्वारा वर्ष 2018 में इस पावर सब-स्टेशन के निर्माण हेतु निविदा जारी की गई थी। लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना को बिहार के संवेदक कृष्णानंदन कुमार को सौंपा गया, जिसे वर्ष 2020 तक कार्य पूर्ण करना था। लेकिन वर्ष 2026 आ जाने के बावजूद परियोजना अधूरी पड़ी है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती जा रही है। हाल ही में हो रहे पीसीसी सड़क निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी देखी गई।नियमानुसार सड़क निर्माण से पूर्व समतलीकरण, दो परत जीएसबी बिछाकर रोलर चलाना अनिवार्य है, लेकिन संवेदक द्वारा कथित रूप से सीधे बालू पर ढलाई की जा रही है, जिससे निर्माण की मजबूती और दीर्घायु पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले को लेकर महुआडांड़ अनुमंडल के सांसद प्रतिनिधि संजय जायसवाल ने सरकार और संबंधित विभाग से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता के धन और अधिकारों के साथ हो रहे खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। 8 छोटे सब-स्टेशनों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती, लो वोल्टेज से मिलती राहत यदि यह पावर सब-स्टेशन समय पर चालू हो जाता, तो महुआडांड़ सहित आसपास के लगभग 8 छोटे सब-स्टेशनों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती। क्षेत्र को लो-वोल्टेज और बार-बार होने वाली कटौती से राहत मिलती, साथ ही कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिलता। परियोजना में हो रही देरी को लेकर जब संवेदक कृष्णानंदन कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों और अन्य बाधाओं का हवाला देते हुए चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि यह सब-स्टेशन कभी पूरा हो पाएगा। संवेदक का यह बयान विभागीय निगरानी और कार्य निष्पादन क्षमता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।


