बंदर की पूंछ व मुर्गा कलंगी पौधा आकर्षण का केंद्र, बिना खाद और मिट्टी के पनप रहे प्लांट्स

आनंद आचार्य | बाड़मेर बाड़मेर प्लांट लवर ग्रुप व नव पल्लव ग्रुप 2026 के संयुक्त तत्वावधान में शहर के रातानाडा स्थित सांईधाम परिसर में 3 दिवसीय फ्लावर एंड प्लांट प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। प्रदर्शनी में किचन गार्डन, औषधीय पौधे, इंडोर व आउटडोर प्लांट्स, वेस्ट से बेस्ट थीम पर आधारित पौधों के साथ-साथ रंग-बिरंगे फूलों की आकर्षक सजावट की गई है। प्रदर्शनी को देखने के लिए सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में स्कूली बच्चें, युवा व शहरवासी पहुंच रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य लोगों में पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण व घरों में हरियाली बढ़ाने के प्रति जागरूकता लाना है। प्रदर्शनी स्थल पर शनिवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में बाड़मेर के कवियों ने पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े अपने भावों को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि इसमें मंकी टेल जिसे स्थानीय भाषा में बंदर की पूंछ का पौधा, मुर्गा कलंगी जिसे हैक्साकॉम व हवा में रहने वाले पौधे आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी में बिना मिट्टी व पानी के उगने वाले एयर प्लांट्स लोगों के लिए खास आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। इन पौधे के लिए किसी भी प्रकार की खाद या मिट्टी की आवश्यकता नहीं रहती है। इन्हें ज्यादा देखरेख की आवश्यकता नहीं होती। घर, ऑफिस व छोटे स्थानों में सजावट के लिए ये पौधे बेहद उपयोगी माने जाते हैं। ठंडे प्रदेशों में ये स्वत: विकसित होते हैं। गर्म स्थानों पर इन पर दो से तीन बार पानी का स्प्रे करना पड़ता है। ^बच्चों व युवाओं में प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित करना ही इस प्रदर्शनी का लक्ष्य है। यहां लगे औषधीय पौधों के उपयोग से अनेक बीमारियां दूर हो सकती है। – वासुदेव जोशी, पर्यावरण प्रेमी मुर्गा कलंगी या वेलवेट प्लांट अपनी मखमली पत्तियों के कारण प्रदर्शनी में अलग पहचान बना रहा है। इसकी पत्तियां देखने में बेहद सुंदर व मुलायम होती हैं, जो हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। यह पौधा इंडोर प्लांट के रूप में काफी लोकप्रिय है। घरों के ड्राइंग रूम व ऑफिस की शोभा बढ़ाता है। आयोजकों ने बताया कि वेलवेट प्लांट वातावरण में नमी बनाए रखने में भी सहायक होता है। ठंडे प्रदेश में इसके बीजों का उपयोग सब्जियों में किया जाता है। ^इस प्रदर्शनी में हजारों की संख्या में पौधे हैं। आमजन इस प्रदर्शनी को देखकर प्रकृति से जुड़ें, इस लक्ष्य के साथ प्रदर्शनी आयोजित की जा रही हैं। – आनंद डागा, पर्यावरण प्रेमी यह पौधा अपनी अनोखी बनावट के कारण प्रदर्शनी में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी लटकती हुई, रोएंदार आकृति लोगों को बंदर के पूंछ की तरह लगती है। यह केक्टस प्रजाति का बिना कांटों का पौधा है। यह पौधा कम पानी में आसानी से पनप जाता है और घरों की बालकनी या गमलों में सजावटी पौधे के रूप में लगाया जा सकता है। आगंतुक इस पौधे के साथ फोटो खिंचवाते नजर आए और इसकी जानकारी लेने में खास रूचि दिखा रहे हैं। प्रदर्शनी में औषधीय पौधों के अंतर्गत दमा बेल को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। यह पौधा आयुर्वेद में श्वसन संबंधी रोगों के लिए उपयोगी माना जाता है। आयोजकों ने बताया गया कि दमा बेल के नियमित उपयोग से सांस की तकलीफ में राहत मिल सकती है। लोग इस पौधे की विशेषताओं के बारे में जानकारी लेकर इसे अपने घरों में लगाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। प्रदर्शनी में औषधीय पौधों की जानकारी लेने के लिए भी लोग प्रेरित हो रहे हैं।

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