ऐरण में गरुड़ स्तंभ और वराह प्रतिमा देखी

भास्कर संवाददाता | विदिशा विदिशा की विरासत समूह ने ऐरण में ऐतिहासिक हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। यह स्थान दशार्ण देश की प्राचीन राजधानी रहा है। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, इतिहास प्रेमी और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग शामिल हुए। गोविंद देवलिया, राजेंद्र कटारे, प्रेम प्रकाश चौबे और शिवकुमार तिवारी सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। हेरिटेज वॉक का मार्गदर्शन इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. मोहनलाल चढ़ार ने किया। उन्होंने एरण के प्राचीन वैभव और यहां मिले पुरातात्विक साक्ष्यों की जानकारी दी। सबसे पहले उन्होंने गरुड़ स्तंभ के महत्व को बताया। यह वैष्णव परंपरा का प्रतीक है। प्राचीन काल में यह धर्म, भक्ति और सत्ता के समन्वय का केंद्र रहा। प्रचार-प्रसार की आवश्यकता: हेरिटेज वॉक में शामिल सदस्यों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आयोजन नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। गोविंद देवलिया ने एरण जैसे स्थलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताई। अंत में सभी ने डॉ. चढ़ार का आभार जताया और भविष्य में भी ऐसे भ्रमण की मांग की। सूक्ष्म शिल्पकला को समझा, वराह अवतार की विशाल प्रतिमा रही आकर्षक का केंद्र इसके बाद प्रतिभागियों ने विशाल विष्णु प्रतिमा देखी। डॉ. चढ़ार ने इसकी कलात्मक शैली, सूक्ष्म शिल्पकला और धार्मिक प्रतीकों की व्याख्या की। सभी लोग इससे प्रभावित हुए। वराह अवतार की विशाल प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें भगवान विष्णु द्वारा पृथ्वी को दानव से मुक्त कराने की कथा उकेरी गई है। भ्रमण के दौरान प्राचीन सती स्तंभ और आसपास के अन्य ऐतिहासिक अवशेषों की जानकारी भी दी गई। डॉ. चढ़ार ने बताया कि ये अवशेष उस समय की परंपराओं, धार्मिक विश्वासों और सामाजिक जीवनशैली को दर्शाते हैं। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण श्रीकृष्ण की संपूर्ण लीला का वर्णन रहा। इसमें बाल्यकाल, माखन चोरी, कालिया मर्दन, गोवर्धन पूजा और महाभारत काल की कथाएं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत की गईं।

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