वार्ड से लेकर कॉरिडोर तक गंदगी,मरीजों को बेडशीट तक नहीं

भास्कर न्यूज | गिरिडीह जिले के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत 700 आउटसोर्सिंग कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को शहर के सदर अस्पताल और चैताडीह मातृत्व व शिशु केंद्र की स्थिति बद से बदतर नजर आई। दोनों अस्पतालों में पिछले दो दिनों से वार्डों की सफाई नहीं होने के कारण चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। अस्पताल के कॉरिडोर में रखे डस्टबिन पूरी तरह भर चुके हैं और कचरा जमीन पर बिखरने लगा है। शौचालयों की हालत भी बेहद खराब हो चुकी है। अस्पताल परिसर में हर तरफ दुर्गंध फैली हुई है। इस अव्यवस्था के बीच मरीज और उनके परिजन मजबूरी में वार्डों में पड़े रहने को विवश हैं। मरीजों को सिर्फ डॉक्टर और नर्स ही देखने आ रहे हैं, जो दवा देकर लौट जा रहे हैं। दवा काउंटर पर प्रशिक्षु कर्मियों को तैनात किया गया है। सदर अस्पताल में पर्ची निर्गत करने के लिए बने चार काउंटरों में से मात्र एक ही खुला हुआ है। डॉक्टरों के चैंबर के बाहर मरीजों की इतनी भीड़ लगी है कि वहां मौजूद अटेंडेंट को मरीजों को समझाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। ड्रेसिंग रूम में कोई कर्मी नजर नहीं आ रहा है और एक्स-रे की प्रक्रिया भी समय पर नहीं हो पा रही है। कुल मिलाकर हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। काउंटर पर मात्र एक कर्मी,बिना जांच के लौटे चैताडीह मातृत्व एवं शिशु केंद्र में इलाज के लिए पहुंची कमरशाली निवासी सरिता देवी ने बताया कि उन्हें ब्लड जांच करानी थी, लेकिन अत्यधिक भीड़ के कारण उन्हें दूसरे दिन आने का नंबर दे दिया गया। जबकि, वह सुबह ही अस्पताल पहुंच गई थीं। जांच काउंटर पर मात्र एक ही कर्मी तैनात था। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बनियाडीह से पहुंची नंदनी ने बताया कि काउंटर पर भारी भीड़ होने के कारण उन्हें बिना जांच कराए ही लौटना पड़ा। वहीं आरती देवी ने बताया कि पिछले दो दिनों से अस्पताल में काफी भीड़ लगी हुई है। बाहर तैनात कर्मी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे थे, जिस वजह से वह बिना इलाज कराए ही लौट गईं। व्यवस्था सामान्य करने का प्रयास : डॉ. प्रदीप सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रदीप बैठा ने बताया कि अस्पताल की सफाई को सुचारू तरीके से करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके पास दो सफाई कर्मी हैं। वहीं, अन्य स्थानों पर कर्मियों को लगाया गया है, जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े।

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