घटेंगे तो कटेंगे, घुसपैठ को रोकने के लिए कसनी होगी भ्रष्टाचार पर लगाम:अश्विनी

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा भारत को स्वाधीन हुए 75 साल से अधिक बीत गए, पर अभी भी अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कई कानून प्रभावी होने से सनातन संस्कृति के समक्ष चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है। हम अंग्रेजी संस्कृति से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। बदलाव के इस दौर में अब जरूरत है एक देश एक विधान के लिए आवाज बुलंद करने की। हिंदूस्तान से एक देश एक विधान का सुर गूंजना चाहिए। यह बात प्रख्यात चिंतक एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने शनिवार को जनचेतना मंच राजस्थान की भीलवाड़ा शाखा द्वारा ‘‘रामराज्य’’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कही। करीब एक घंटे तक विभिन्न मुद्दों व राष्ट्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर बेबाक उद्बोधन में उपाध्याय ने कहा कि सांसद हो या विधायक हमारे जनप्रतिनिधियों पर इस बात के लिए दबाव बनाना होगा कि वे संसद और 4 विधानसभा में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए सनातन विरोधी कानूनों और ऐसे प्रावधानों को बदले, जो राष्ट्र में बहुसंख्यक समाज के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुके हैं। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर कई जनहित याचिका लगा चुके अधिवक्ता उपाध्याय ने कहा कि भारत की उस व्यवस्था को बदलना होगा जिसमें मंदिर और मठ सरकारी नियंत्रण में आते हैं पर अन्य धर्मो के पूजा स्थल उससे बाहर है। ऐसे करीब चार लाख मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने पर वहां आने वाले पैसे से ही गौसेवा से लेकर मानव सेवा तक के कई कार्य हो सकते है। उन्होंने कहा कि धर्मान्तरण रोकने के साथ घर वापसी के लिए अभियान चलाना होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत हिन्दु धर्मावलम्बियों को भी उनके देवताओं के प्रतीक चिन्ह रूपी त्रिशूल, कुल्हाड़ी, तलवार, गंडासा आदि रखने का अधिकार मिलना चाहिए। संगोष्ठी में अधिवक्ता उपाध्याय ने बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक से जुड़े मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक कौन है यह तय करना होगा। अल्पसंख्यक उस कहते है जिसकी आबादी कुछ लाख तक रह गई हो। दुनिया के किसी मुल्क में ऐसा नहीं है जहां करोड़ो की आबादी वाला समाज अल्पसंख्यक होने के नाम पर विशेष सुविधाएं प्राप्त कर रहा हो। भारत में सरकार को अल्पसंख्यक के नाम पर दी जाने वाली सुविधाएं समाप्त कर सभी नागरिकों को एक समान अधिकार ओर कर्तव्य सुनिश्चित करने चाहिए। मजहबी आधार पर बनी संस्थाओ को कोई सरकारी सहायता नहीं मिलनी चाहिए। किसी धर्म विशेष के लिए अलग शिक्षा का प्रावधान नहीं होकर एक राष्ट्र एक पाठ्यक्रम तय होना चाहिए। संगोष्ठी में विधायक अशोक कोठारी,हरिशेवाधाम के महामंडलेश्वर हंसाराम महाराज, जनचेतना मंच राजस्थान के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आईएम सेठिया, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड, वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष मदन खटोड़, हिंदू जागरण मंच के प्रांत सह संयोजक बनवारीलाल व्यास व जनचेतना मंच राजस्थान के महासचिव लोकेश व्यास मंचासीन थे। संचालन सीताराम सोनी ने किया। अधिवक्ता उपाध्याय का जिला अभिभाषक संस्थान के अध्यक्ष उम्मेदसिंह राठौड़ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने स्वागत किया। राजेंद्र ओस्तवाल, डॉ. शंकरलाल माली, हनुमान अग्रवाल, बद्रीलाल सोमानी, ललित अग्रवाल, रामनरेश विजयवर्गीय, परिवेश डाड ने भी उपाध्याय का स्वागत किया। उपाध्याय बोले: करोड़ों की आबादी वाले अल्पसंख्यक कैसे हो सकते हैं…

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