झांकीवाले बालाजी मंदिर में उत्सव 27 से 31 जनवरी तक

भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर पुरानी आबादी स्थित सिद्धपीठ श्रीझांकीवाले बालाजी मंदिर के 51वें वार्षिकोत्सव को लेकर पूरे शहर में उत्सव सा माहौल बनने लगा है। मंदिर समिति की ओर से तैयारियां अंतिम चरण में हैं। चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर रंग-बिरंगी फर्रियों से सजावट की जा रही हैं। वहीं, घर-घर जाकर आमंत्रण कार्ड बांटे जा रहे हैं। शहर सहित आसपास के इलाके में अब तक 21 हजार कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। यह वितरण टोलियां बनाकर किया जा रहा है, ताकि शहर का कोई भी वर्ग इस धार्मिक आयोजन से वंचित न रहे। इन निमंत्रण पत्रों का विमोचन कलेक्टर डॉ. मंजू ने 27 दिसंबर को किया था। मुख्य सेवादार प्रेम अग्रवाल ने बताया कि यह उत्सव 27 से शुरू होकर 31 जनवरी तक चलेगा। उत्सव का शुभारंभ 27 जनवरी को धर्म ध्वजा यात्रा के साथ होगा। यह यात्रा अग्रसेन चौक से सुबह 9 बजे रवाना होगी और करीब 11 बजे मंदिर परिसर पहुंचेगी। पुजारी सुरेंद्र सिंगल के अनुसार यात्रा के मंदिर पहुंचते ही पांच दिवसीय अखंड राम नाम संकीर्तन ‘सियाराम जय जय सियारामा, सियारामा जय रामा जय जय राम’ का शुभारंभ होगा, जो 31 जनवरी तक लगातार चलेगा। अखंड संकीर्तन के साथ-साथ प्रतिदिन भंडारे का आयोजन होगा : अखंड संकीर्तन के साथ-साथ प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भंडारे के लिए अब तक 250 सवामणियां बुक हो चुकी हैं। आयोजन समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए भंडारे की व्यवस्थाएं व्यापक स्तर पर की जा रही हैं, ताकि किसी को भी असुविधा न हो। मेले को आकर्षक स्वरूप देने के लिए इसका नाम ‘आयो उत्सव म्हारे बाबा को’ रखा : उत्सव का समापन 31 को शाम सवा छह बजे भजन वर्षा के साथ होगा। इसी के साथ अखंड राम नाम संकीर्तन की पूर्णाहुति संपन्न होगी। मेले को आकर्षक स्वरूप देने के लिए इसका नाम ‘आयो उत्सव म्हारे बाबा को’ रखा गया है, जो श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह पैदा कर रहा है। आमंत्रण कार्ड वितरण की जिम्मेदारी कार्ड वितरण प्रभारी नरेश अरोड़ा, एडवोकेट रेणु वर्मा, अंजू अरोड़ा, पूजा छाबड़ा, रणवीर गोदारा, राजकुमार कुलड़िया, मन्नू सेतिया, लवली मिड्ढा, प्रदीप गर्ग, बॉबी कांसल, योगेश वधवा, बॉबी मित्तल सहित 200 से अधिक सेवादार कार्ड बांटने में जुटे हुए हैं। मंदिर समिति का कहना है कि यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और श्रद्धा का भी प्रतीक है।

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