भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा राज्य पशु ऊंट की संख्या में लगातार हो रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए पीपल फॉर एनिमल (पीएफए) के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने सरकार से ऊंट संरक्षण के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते राज्य पशु को संरक्षण नहीं मिला, तो आने वाले वर्षों में ऊंट केवल पुस्तकों और तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएगा। ऊंटों की संख्या घटकर मात्र 20 प्रतिशत रह गई है। जाजू ने शनिवार को सिरोही जिले में पीपल फॉर एनिमल सिरोही एवं महावीर ऊंट विहार संस्थान की ओर से संचालित निराश्रित बीमार पशु गृह एवं ऊंट संरक्षण केंद्र का अवलोकन करने के बाद कहा कि ये संस्थाएं निराश्रित, बीमार एवं घायल ऊंटों के संरक्षण और उपचार में सराहनीय कार्य कर रही हैं। इस अवसर पर सिरोही के जसराज श्रीश्रीमाल ने बताया कि किसी भी लावारिस या निराश्रित ऊंट को संरक्षण के लिए सिरोही भेजा जा सकता है, संस्था उनके संरक्षण के लिए तैयार है। इस दौरान पीएफए भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष सुनील जागेटिया, गोपाल बांगड़, पीएफए सिरोही के जिलाध्यक्ष भरत सिंघवी, चंद्रभान मोटवानी, आशुतोष पटनी, मनोहर सिंह उपस्थित रहे। वर्तमान में इन संस्थाओं की ओर से 271 ऊंटों की सेवा-देखभाल, चारा-पानी एवं समुचित चिकित्सा व्यवस्था की जा रही है, जो प्रशंसनीय है। जाजू ने मुख्यमंत्री एवं पशुपालन मंत्री से मांग की कि राज्य पशु ऊंट के संरक्षण के लिए कार्यरत संस्थाओं को विशेष सहायता एवं पर्याप्त अनुदान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही परंपरागत रूप से ऊंट पालन करने वाली रेबारी जाति को मिलने वाले अनुदान एवं प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की आवश्यकता पर भी बल दिया। 271 ऊंटों की देखभाल, चिकित्सा कर रहे


