इस साल अधिक बारिश से भीलवाड़ा सहित अन्य जिलों में बारिश की अधिकता से भीगने के कारण मक्का की क्वालिटी खराब हो गई । खाद्यान व्यापार संघ के महासचिव हेमंत बाबेल के अनुसार महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मक्का की क्वालिटी अच्छी होने से पंजाब और हरियाणा की पोल्ट्री फार्म वालों ने राजस्थान के बजाय महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश के मक्का की खरीद को प्राथमिकता दी। ऐसे में हमारे मक्का की डिमांग घटने से भावों में कमी हुई है। हर साल मक्का 20 दिसंबर तक ही मंडी में आता है, लेकिन इस बार जनवरी बीतने को होने पर भी मंडी में मक्का आ रहा है। वैसे हर साल 15 जनवरी तक रबी की फसल सरसों की आवक हो जाती है, लेकिन इस बार देर तक बारिश चलने से खेत सूखने में समय लगने से देरी से बुआई के कारण अभी तक सरसों नहीं पहुंची। सरसों अगले महीने तक मंडी में पहुंचने लगेगी। कृषि उपज मंडी में अभी भी लगे हैं मक्का के ढेर। भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में हर साल 15 से 20 जनवरी तक ही खरीफ की जिंसों की आवक रहती है, उसके बाद माल आना नगण्य हो जाता है, लेकिन इस बार अभी भी रोज मक्का की करीब एक हजार बोरी लेकर किसान पहुंच रहे हैं। देरी तक मक्का पहुंचने के पीछे किसानों की सोच थी कि सीजन में मक्का 1950 रुपए प्रति क्विंटल बिका तो, कुछ दिन रोकने पर महंगा बिकेगा, लेकिन किसानों की यह उम्मीद धराशायी हो गई, क्योंकि वर्तमान में मंडी में पहुंच रहा मक्का 1600 से 1700 रुपए प्रति क्विंटल में ही बिक रहा है। ऐसे में किसान को फायदे के बजाय प्रति क्विंटल 250 रुपए का नुकसान हो रहा है। मक्का के भाव में कमी को लेकर मंडी व्यापारियों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा की पोल्ट्रीफार्म में मांग घटने और यहां की मक्का के बारिश में भीगने से क्वालिटी खराब होने से कीमत बढ़ने के बजाय घटी है। एक महीने पहले तक सीजन में रोज 10 हजार कट्टे यानी 5 हजार बोरी की आवक थी। इस समय रोज हजार बोरी मक्का के अलावा करीब 50 बोरी ग्वार की आवक हो रही है, लेकिन भाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ग्वार प्रति क्विंटल 5500 से 5700 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। वैसे मंडी में बिकने के लिए खरीफ की फसल की आवक 20 दिसंबर तक ही रहती है।


