कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत फुलवरिया गांव के किसान पप्पू कुमार ने पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती को अपनाकर नई पहचान बनाई है। कभी सब्जी की खेती करने वाले पप्पू ने गेंदा, चेरी और जाफरी जैसे फूलों की खेती शुरू की और आज वह इससे सालाना 10 से 12 लाख रुपए तक की आमदनी कर रहे हैं। पप्पू ने शुरुआत महज एक कट्ठे जमीन से की थी, लेकिन मेहनत और सही मार्केटिंग के दम पर आज वह तीन एकड़ भूमि पर फूलों की खेती कर रहे हैं। उनकी सफलता आसपास के गांवों के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो अब खेती को सिर्फ गुजारे का साधन नहीं, बल्कि मुनाफे का जरिया मानने लगे हैं। कोरोना ने बदली राह, फूलों ने दिया सहारा पप्पू कुमार ने बताया कि वर्ष 2006 में उन्होंने एक नेटवर्किंग कंपनी में काम शुरू किया था और पूरे देश में करीब पांच लाख लोगों की टीम खड़ी की थी। साल 2019 तक वह इसी कंपनी से जुड़े रहे, लेकिन 2020 में कोरोना काल की शुरुआत होते ही कंपनियां बंद हो गईं और वे बेरोजगार हो गए। आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद उन्होंने गांव लौटकर खेती करने का फैसला लिया। शुरुआत में उन्होंने अन्य किसानों से अलग हटकर फूलों की खेती का जोखिम उठाया। धीरे-धीरे बाजार में उनके फूलों की मांग बढ़ने लगी और मुनाफा भी बढ़ता चला गया। आज उनके खेतों में लाल गेंदा, पीला गेंदा, चेरी और जाफरी की खेती हो रही है। वे 20 फूलों की एक कुड़ी 35 रुपए में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उनके फूल कोडरमा के साथ-साथ रांची, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, चतरा और बिहार के कई जिलों में भेजे जाते हैं। अब आयुर्वेदिक पौधों की करेंगे खेती पप्पू अपनी जमीन के साथ-साथ लीज पर ली गई भूमि पर भी खेती कर रहे हैं। इस काम में उनके परिवार के लोग तो जुड़े ही हैं, साथ ही गांव के करीब एक दर्जन महिला–पुरुषों को भी रोजगार मिला है। पप्पू की सफलता में उनकी पत्नी का अहम योगदान रहा है, जिन्होंने कोरोना काल में हर कदम पर उनका साथ दिया। पप्पू अब भविष्य में अश्वगंधा, सतावर और मुसली जैसे आयुर्वेदिक पौधों की खेती की योजना बना रहे हैं। उनकी पत्नी ने कृषि विभाग से सोलर पैनल देने की मांग की है, ताकि सिंचाई की समस्या खत्म हो और खेती का विस्तार हो सके। पप्पू कहते हैं कि फूलों की खेती ने उन्हें न सिर्फ आर्थिक मजबूती दी, बल्कि समाज में सम्मान भी दिलाया है।


