राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित हो रहे हिन्दू सम्मेलनों की कड़ी में रविवार को छकतला खंड के मथवाड़ मंडल में एक विशाल हिन्दू सम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में मथवाड़ मंडल के मथवाड़, करजवानी, दुधवी, चिलवट, वाकनेर, केल्दीकीमाल, कालीबेल सहित छकतला खंड के अन्य ग्रामों से हजारों की संख्या में माताएं, बहनें, बच्चे, वरिष्ठजन और संत समाज उपस्थित रहा। कार्यक्रम की शुरुआत में राधिका सस्तिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि अब हमें जाति-पाति, समाज और भाषा के मतभेदों में नहीं उलझना चाहिए। उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से सभी को एकजुट होकर हिन्दू आधार पर समाज के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। राधिका सस्तिया ने ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर पर्यावरण, नागरिक अनुशासन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता और स्वदेशी जैसे बिंदुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के धड़गांव से आए संत केशवदास महाराज ने श्रीमद्भागवत गीता पर आधारित उदाहरणों के माध्यम से हिन्दू धर्म की महत्ता समझाई। उन्होंने यह भी बताया कि एक संगठित हिन्दू समाज किस प्रकार समाज को मजबूत कर सकता है। मुख्य वक्ता मालवा प्रांत के प्रांत प्रचारक राजमोहन ने कहा कि प्राचीन काल में भारत एक संपन्न और सशक्त राष्ट्र था, जिसे ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। उन्होंने बताया कि कालांतर में विदेशी ताकतों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति ने हिन्दुओं को जाति, भाषा और क्षेत्र में बांटकर उनकी संगठित शक्ति को कमजोर किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें हजारों वर्षों तक अत्याचार और गुलामी झेलनी पड़ी। सम्मेलन की अन्य तस्वीरें…


