भिलाई खुर्द में खदान विस्तार पर ग्रामीणों का आक्रोश:पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को सौंपा ज्ञापन, पुनर्वास में भेदभाव का आरोप

कोरबा के भिलाई खुर्द क्रमांक–1 से रविवार दोपहर 50 से अधिक ग्रामीणों ने खदान विस्तार योजना के तहत हो रहे कथित भेदभाव, अल्प मुआवजे और पुनर्वास की अनिश्चितता के खिलाफ पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से उनके निवास पर मुलाकात की। ग्रामीणों ने उन्हें एक सामूहिक ज्ञापन सौंपकर SECL प्रबंधन और प्रशासन की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए। ज्ञापन में SECL की कथित वादाखिलाफी को प्रमुख मुद्दा बताया गया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रबंधन ने पहले मानिकपुर जीएम कार्यालय के सामने खाली भूमि में प्रत्येक विस्थापित परिवार को 6-6 डिसमिल जमीन देने का वादा किया था। हालांकि, अब विस्थापन के समय इस वादे से मुकरते हुए 6.70 लाख रुपए (3 लाख जमीन खरीद और 3.70 लाख निर्माण के लिए) की राशि देने का प्रस्ताव दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कोरबा जैसे शहर में 3 लाख रुपए में 6 डिसमिल जमीन मिलना असंभव है। जो सीआईएल आर एंड आर नीति 2012 के ‘बेहतर जीवन स्तर’ के सिद्धांत का उल्लंघन है। 2023 की कट-ऑफ डेट के सर्वे पर आपत्ति उन्होंने 2023 की कट-ऑफ डेट पर किए गए सर्वेक्षण पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क है कि 2024 में कई परिवारों में वृद्धि हुई है और आवश्यक निर्माण भी हुए हैं, जबकि अधिग्रहण व भुगतान प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में ‘आज की तारीख’ के अनुसार सर्वेक्षण न करने को अनुचित बताया गया। मूल निवासियों को सूची से बाहर करने का आरोप ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि लगभग 50-60 मूल निवासी परिवारों को पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके विपरीत, हाल ही में जमीन खरीदने वाले बाहरी और प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। डीएमएफ सहायता नहीं मिलने पर उठे सवाल ग्रामीणों ने इसे अनुच्छेद 14 और पीएमकेकेकेवाई के सिद्धांतों के विपरीत बताया। साथ ही, देश के समृद्ध डीएमएफ जिलों में शामिल कोरबा में नियम 22 के तहत पुनर्वास के लिए डीएमएफ सहायता न देने पर भी सवाल उठाए गए।

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