धर्मशाला में बर्फबारी नहीं होने से पर्यटन कारोबार प्रभावित:कांगड़ा में 90% कम बारिश हुई; होटल कारोबारियों ने इंद्रुनाग मंदिर में की पूजा

धर्मशाला में इस सर्दी बर्फबारी न होने से पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे चिंतित होटल कारोबारियों ने रविवार को प्रसिद्ध इंद्रुनाग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने धौलाधार की पहाड़ियों पर जल्द बर्फबारी और बारिश की कामना की। परंपरा के अनुसार, होटल एसोसिएशन धर्मशाला के सदस्यों ने भगवान शिव के स्वरूप इंद्रुनाग देवता का जलाभिषेक किया। इस दौरान यज्ञ और हवन भी किया गया, जिसमें क्षेत्र में अच्छी बर्फबारी और बारिश के लिए प्रार्थना की गई।होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि बर्फबारी न होने के कारण विंटर टूरिज्म लगभग ठप हो गया है। इसका सीधा असर होटलों की बुकिंग और स्थानीय रोजगार पर पड़ रहा है। धर्मशाला की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर करती है, और बर्फबारी इसके लिए महत्वपूर्ण है। कारोबारियों ने यह भी कहा कि बर्फ सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ही नहीं, बल्कि जल स्रोतों को रिचार्ज करने और गर्मियों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। यदि मौजूदा हालात बने रहते हैं, तो आने वाले महीनों में गंभीर जल संकट गहराने की आशंका है। 90% बारिश में कमी इस बीच, मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कांगड़ा जिले में इस सर्दी के मौसम में बादलों ने निराश किया है। 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच, सामान्य तौर पर 18.5 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 1.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह बारिश में लगभग 90 प्रतिशत भारी कमी दर्शाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर और दिसंबर महीने भी लगभग सूखे ही रहे हैं, जो मौजूदा स्थिति को और अधिक चिंताजनक बनाता है।होटल एसोसिएशन ने पर्यटकों से अपील की है कि भले ही बर्फबारी में देरी हो रही हो, लेकिन धर्मशाला की प्राकृतिक सुंदरता, शुद्ध हवा, तिब्बती संस्कृति और आध्यात्मिक शांति का आनंद लेने के लिए यह समय अब भी बेहतर है। हिमाचल में मान्यता है कि जब भी सूखा या प्राकृतिक संकट आता है, तो लोग वर्षा के देवता इंद्रुनाग की शरण में जाते हैं। होटल कारोबारियों को उम्मीद है कि पूजा-अर्चना के बाद जल्द ही मौसम मेहरबान होगा और धौलाधार की पहाड़ियां फिर से चांदी जैसी सफेद नजर आएंगी।

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