विदेशों में सुनहरे भविष्य और आर्थिक तंगी दूर करने का सपना लेकर गई भारतीय महिलाओं की त्रासदी ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। ओमान के मस्कट में फंसी एक मजबूर मां अपने 8 वर्षीय बेटे नवदीप के अंतिम दर्शनों के लिए तड़प रही है, जबकि नियोक्ता उसे वापस भेजने के बदले लाखों रुपए की मांग कर रहे हैं। ब्लड कैंसर से जूझ रहे मासूम नवदीप का शव पिछले एक सप्ताह से घर में अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में रखा गया है, क्योंकि परिवार ने संकल्प लिया है कि बच्चे को मुखाग्नि उसकी मां के आने पर ही दी जाएगी। आर्थिक तंगी और एजेंटों का जाल: नवदीप के पिता मंगा सिंह ने रुंधे गले से बताया कि बेटे के इलाज के कारण परिवार भारी कर्ज में डूब गया था। इसी कर्ज को उतारने के लिए उनकी पत्नी पिछले साल सितंबर में ओमान गई थीं। एजेंटों ने उन्हें मस्कट में घरेलू काम के लिए 25-30 हजार रुपए वेतन का झांसा दिया था। तीन महीने काम करने के बाद जब उन्हें बेटे की गंभीर हालत का पता चला, तो उन्होंने मालिक से घर जाने की मिन्नतें कीं, लेकिन निर्दयी नियोक्ता ने वापसी के बदले लाखों रुपए की मांग रख दी। एक और त्रासदी-पति के अंतिम दर्शन को तरसी पत्नी: तरनतारन जिले से भी ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया है। ओमान में फंसी एक अन्य महिला अपने पति रसल सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकी। परिवार ने कई दिनों तक शव को इस उम्मीद में रोके रखा कि शायद सरकार की मदद से पत्नी आखिरी बार पति का चेहरा देख सके, लेकिन अंततः हार मानकर मजबूरी में अंतिम संस्कार करना पड़ा। वह महिला अब भी ओमान में फंसी हुई है और उसकी वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। सांसद सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय से लगाई गुहार: इन दोनों पीड़ित परिवारों ने राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। सांसद सीचेवाल ने इन मामलों को तुरंत विदेश मंत्रालय (MEA) के संज्ञान में लाया है। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली हैं, जहाँ एक मां को उसके मृत बच्चे और एक पत्नी को उसके दिवंगत पति से मिलने से रोका जा रहा है। उन्होंने सरकार से इन महिलाओं की सुरक्षित और तत्काल स्वदेश वापसी की मांग की है। सावधानी ही बचाव: एजेंटों के झांसे में न आएं: इस दुखद अवसर पर संत सीचेवाल ने पंजाब के लोगों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी और कानूनी प्रक्रिया के बिना विदेश जाने का निर्णय कई बार जीवन के लिए घातक साबित होता है। ओमान जैसे देशों में घरेलू कामगारों के साथ होने वाले शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए लोगों को बिना जांच-पड़ताल के एजेंटों के झांसे में आने से बचना चाहिए। इंसाफ का इंतजार: फिलहाल दोनों परिवारों की आंखें सरकार की ओर टिकी हैं। मस्कट में फंसी मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वह हर पल अपने बेटे के अंतिम दीदार की प्रार्थना कर रही है। अब देखना यह है कि विदेश मंत्रालय कितनी जल्दी इन ‘आधुनिक दासता’ की शिकार महिलाओं को उनके घर वापस लाने में सफल होता है।


