विदिशा में 15 स्थानों पर हुए हिंदू सम्मेलन:कलश यात्रा के साथ धर्म, एकता और पंच परिवर्तन का संदेश

विदिशा जिले में आज (रविवार) कई स्थानों पर हिंदू सम्मेलन हुए। इन सम्मेलनों में संतों और समाज के प्रबुद्धजनों ने धर्म, एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। वक्ताओं ने संगठन, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक शिष्टाचार पर विशेष जोर दिया। जिले में लगभग 15 स्थानों पर ऐसे सम्मेलन हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। इसी श्रृंखला के तहत, विदिशा जिले के खंड सूर्यनगर (शमशाबाद) स्थित महुटा मंडल के 14 ग्रामों का एक विशाल हिंदू सम्मेलन ग्राम महुटा में आयोजित किया गया। शुरुआत ग्राम महुटा के हनुमान मंदिर से एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जो गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में महंत अंबिका दास जी (आमझिर सिद्ध आश्रम), पंडित संतोष प्रसाद जी, प्रकाश नारायण जी, उमाशंकर जी, गोविंद सिंह जी (बाल ब्रह्मचारी), शिवप्रसाद जी साहू और मुख्य वक्ता के रूप में विदिशा जिला प्रचार प्रमुख वीरेंद्र जी रघुवंशी उपस्थित रहे। भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। नर्मदा मैया के भजन प्रस्तुत
इसके बाद बच्चों द्वारा देशभक्ति गीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। नर्मदा परिक्रमा से लौटे यात्री शिवप्रसाद जी साहू ने नर्मदा मैया के भजन प्रस्तुत किए और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। मुख्य वक्ता वीरेंद्र जी रघुवंशी ने हिंदू की परिभाषा स्पष्ट करते हुए समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। उन्होंने पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक शिष्टाचार, सामाजिक समरसता और ‘स्व’ के भाव को जीवन में उतारने का आग्रह किया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की सामूहिक आरती और प्रसादी वितरण के साथ हुआ। संवाद की कमी पर चिंता जताई
उन्होंने कहा कि जीवन में भेदभाव और अलगाव की दृष्टि को समाप्त कर सभी को अपना मानकर व्यवहार करना चाहिए। जाति, पंथ और भाषा से ऊपर उठकर हिंदू समाज को एकजुट रहना समय की आवश्यकता है। उन्होंने परिवार और समाज में संवाद की कमी पर चिंता जताते हुए सप्ताह में एक दिन पूरे परिवार के साथ बैठकर भजन, संवाद और सामूहिक भोजन की परंपरा को पुनर्जीवित करने की बात कही। साथ ही देशहित में सोचने, हिंदुत्व की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा लेने और कुटुंब प्रबोधन पर बल दिया। पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक के बहिष्कार, पौधरोपण और घरों में सब्जियां उगाने का संदेश दिया। साथ ही मातृभाषा के प्रयोग, स्थानीय भाषा सीखने, पारंपरिक वेशभूषा अपनाने और नियम, कानून व संविधान का पालन करने की अपील की। कार्यक्रम का समापन भारत माता की सामूहिक आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात समस्त हिंदू समाज द्वारा उपस्थित जनसमूह को बूंदी प्रसादी का वितरण किया गया।

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