वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक गोसेवक व संत की प्रेरणादायक पहल सामने आई है। गोसेवक ने पिछले 10 वर्षों में 2 किलोमीटर की बंजर भूमि पर करीब 5 हजार पौधे लगाकर नई जान डाल दी। इन पौधों से न सिर्फ पर्यावरण सुधरा, बल्कि पशु-पक्षी और मानव जीवन को भी सांसें मिली हैं। यह श्रेय जाता है… अलवर के टहला तहसील के धीरोड़ा गांव में रहने वाले गोसेवक संत प्रदीप चौधरी को। इस गोसेवक ने पूरा जीवन ही पर्यावरण को समर्पित कर रखा है। चौधरी बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में जुटे हैं। शुरुआत में एक एनजीओ के साथ जंगलों में पौधे लगाने का काम शुरू किया। फिर पानी के लिए एनिकट बनवाए। अब 10 साल में दो किमी में 250 वैरायटी के 5 हजार पौधे लगाकर उल्लेखनीय काम किया। खास यह कि लगाए गए पौधों की सफलता दर (सर्वाइवल रेट) लगभग 95 प्रतिशत रही, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। चौधरी का सपना अब पास वाली बंजर एवं उजाड़ भूमि पर हर्बल पार्क बनाने का है। इसमें सरिस्का के जंगल में पाए जाने वाले पौधे लगाना चाहते हैं। इसके लिए 19 दिसंबर को भोपाल में आयोजित हर्बल मेले में गए थे। पीपल और बरगद के 2,500 पेड़ लगाए इसमें पीपल और बरगद के 2,500 पेड़ शामिल हैं। पेड़ों के साथ गोशाला में दुर्घटनाग्रस्त गायों की सेवा करते हैं। वर्तमान में गोशाला में 150 गायें हैं। इनमें से अधिकतर बीमार या विकलांग हैं। चौधरी लंबे समय से गोसेवा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में भी सक्रिय हैं। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से 10 साल पहले बंजर और उजाड़ पड़ी भूमि को हराभरा बनाने का संकल्प लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद पौधरोपण का कार्य शुरू किया गया, जिसे समय के साथ एक अभियान का रूप दे दिया गया। 10 साल में पेड़ों की ऊंचाई 15 फीट पहुंची गोसेवक चौधरी ने 10 साल में 2 किमी में 250 वैरायटी के पेड़ लगाए हैं। इसमें नीम, बांस, आंवला, कुचला, गरुड़, कुंभी, रीटा, पीपल, बरगद, शीशम, जामुन, अर्जुन और फलदार पौधों सहित कई स्थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल हैं। पहले बंजर नजर आने वाला 2 किमी का क्षेत्र अब हराभरा नजर आता है। पौधों के चयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि वे स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हों। अब पौधे 15 फीट तक बढ़ चुके हैं। अभियान में लगाए पौधे 0.25% भी नहीं बचे निगम अधिकारियों ने हरियालो राजस्थान के तहत शहर के पार्कों में पौधरोपण कर वाहवाही लूटी। अभियान में लगे पौधों की सफलता दर 0.25 फीसदी भी नहीं रहती है। बारिश में निगम ने राजधानी के 1 हजार पार्कों में करीब 7 लाख पौधरोपण करने का दावा किया। इनमें से 2,500 पौधे ही जिंदा रहे हैं। सक्सेस रेट कुछ पॉइंट पर 0.25 फीसदी रही है, जो कि न के बराबर है। पौधे लगाने के दौरान जीओ-टैग किया था, इसके बावजूद पौधे मर गए।


