भास्कर न्यूज | अमृतसर भारतीय प्रबंध संस्थान अमृतसर में चल रहे 5वें 3 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का मुख्य फोकस ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का नया स्वरूप और इनोवेशन’ था। सम्मेलन के दौरान देश-विदेश के दिग्गज मैनेजमेंट गुरुओं ने छात्रों और शोधकर्ताओं को रिसर्च के नए गुर सिखाए। खास बात यह रही कि पढ़ाई और गंभीर चर्चाओं के बीच प्रतिभागियों ने अटारी-वाघा बॉर्डर का दौरा किया और वहां के जोश को महसूस किया। समापन समारोह में आईआईएम अमृतसर के डॉ. सुजीत रघुनाथराव जगदाले ने कहा कि एमएसएमई को सिर्फ पैसे कमाने या जीडीपी बढ़ाने का जरिया न समझें। यह समावेशी विकास की आधारशिला है, जो अर्थव्यवस्था के साथ-साथ समाज को भी आकार देता है। “सम्मेलन की अध्यक्ष डॉ. रिया सिंगला ने बताया कि इस आयोजन से नए शोधकर्ताओं को इंडस्ट्री के दिग्गजों से जुड़ने और सीखने का बेहतरीन मौका मिला है। मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के प्रो. बालाजी पद्मनाभन और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के प्रो. सौगाता ने कहा कि मैनेजमेंट की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रह सकती। आईआईएम इंदौर के प्रो. रणजीत नंबूदिरी और प्रो. संजीव त्रिपाठी ने जोर दिया कि क्लासरूम की थ्योरी को असली दुनिया की रिसर्च से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। अंतिम दिन इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रो. शाश्वत आलोक ने छात्रों को ‘गुरु मंत्र’ दिया। उन्होंने कहा कि रिसर्च रातों-रात नहीं होती। इसके लिए जिज्ञासा, धैर्य और लगातार सीखने की ललक चाहिए। सही सवाल पूछना ही एक अच्छी रिसर्च की शुरुआत है। आईआईएम अहमदाबाद के प्रो. जोशी जैकब ने बताया कि रिसर्च में डेटा का सही इस्तेमाल कैसे करें। उनके सत्र में छात्रों ने काफी उत्साह दिखाया। सम्मेलन के आखिरी दिन बेस्ट रिसर्च के लिए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। पहला पुरस्कार गौहर रसूल, अंजलि पठानिया और अवंतिका बक्शी, दूसरा पुरस्कार भावना सहगल को मिला। डॉक्टरेट कोलोकीअम सम्मान थेजस सी नायर, अर्चना कुमारी, सिमरन गुप्ता और राहुल कुमार को दिया गया।


